औद्योगिक नगरी में नोटबंदी की घोषणा के बीस दिन बाद भी बैंक शाखाओं में दो तिहाई नकदी की कमी बनी हुई है। आरबीआई चेस्ट से महज 30 फीसदी नकदी बैंकों में आ पा रही है। यही कारण है कि बैंकों से बड़ी संख्या में खाता धारक बगैर नकदी लिए घर वापस लौटने को मजबूर हैं।
बैंक अधिकारियों की मानें तो अभी यह समस्या करीब 15 दिन तक और बनी रहेगी। वहीं दूसरी ओर औद्योगिक क्षेत्र की 298 बैंक शाखाओं में अब तक 3100 करोड़ से अधिक पुराने नोट जमा किए जा चुके हैं, जबकि निकासी महज 302 करोड़ ही हो पाई है। दिन गुजरने के साथ-साथ अब पुराने नोट जमा करने की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है। इस बात की जानकारी लीड बैंक मैनेजर इंद्रमोहन शर्मा ने दी।
उन्होंने बताया कि जिले में एक अनुमान के अनुसार प्रतिदिन करीब 80 करोड़ नकदी की मांग होती है। इसके अनुपात में अभी तक महज 27 से 30 करोड़ रुपये की बैंक शाखाओं में पहुंच पा रहे हैं। एटीएम की व्यवस्था में भी अभी सुधार नहीं हो पाया है। जिले के 661 एटीएम में से महज 20 फीसदी एटीएम ही रिकैलीब्रेट (नए नोटों के अनुकूल बनाना) हो पाए हैं। अभी ये समस्या दो हफ्ते तक बनी रहेगी।
40 करोड़ की नई नकदी दबाकर बैठे हैं लोग
शर्मा ने बताया कि नोटों की बदली और निकासी में से करीब 40 करोड़ की नकदी लोग दबाकर बैठ गए हैं। यानी वह पैसा मार्केट में नहीं आ पाया है और न ही बैंकों में जमा किया गया। यह भी समस्या का एक प्रमुख कारण है। लोगों को चाहिए कि वह नए नोटों को मार्केट में सर्कुलेट करते रहें ताकि मुद्रा प्रचलन में बनी रहे।
केवल दस फीसदी सरकारी एटीएम उगल रहे पैसे:
जिले में सरकारी और निजी बैंकों के कुल 661 एटीएम अलग-अलग स्थानों पर लगे हैं। इनमें सरकारी एटीएम की संख्या 40 फीसदी और निजी बैंकों के एटीएम की संख्या 60 फीसदी है। निजी बैंकों ने अपने ज्यादातर एटीएम चलाने तो शुरू कर दिए लेकिन सरकारी एटीएम अभी प्रॉपर तरीके से नहीं चल पा रहे हैं। शर्मा ने बताया कि अभी सरकारी बैंकों के महज 10 फीसदी एटीएम ही चल रहे हैं। उनमें भी 100-100 के नोट ही डाले जा रहे हैं। कुल मिलाकर 20 फीसदी एटीएम को नए नोटों के अनुकूल सेट किया जा चुका है। 500-500 रुपये के नोटों की सप्लाई आते ही समस्या खत्म हो जाएगी।