प्रदूषण पर लगाम लगाने की रणनीति तैयार, 1 अक्तूबर से 500 पंपों पर नो पीयूसीसी-नो फ्यूल और 1 नवंबर से 50% वर्क फ्रॉम होम
10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण-तोड़फोड़ नहीं होगा, 334 प्रवर्तन टीमें और 60 एयर मॉनिटरिंग स्टेशन करेंगे निगरानी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली में बाहर के बीएस-4 पेट्रोल-डीजल वाहनों के प्रवेश पर 1 नवंबर से रोक रहेगी। सर्दियों में प्रदूषण बढ़े इससे पहले सरकार ने इसके रोकथाम की तैयारी कर ली है। सोमवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने विंटर एक्शन प्लान 2026-27 के तहत वाहनों, निर्माण, दफ्तरों, उद्योगों, सड़क की धूल और कूड़ा जलाने पर कार्रवाई का खाका पेश किया। 1 अक्तूबर से 500 एएनपीआर युक्त पेट्रोल पंपों पर 'नो पीयूसीसी-नो फ्यूल' व्यवस्था को मिशन मोड में लागू किया जाएगा।
ट्रैफिक दबाव घटाने के लिए 1 नवंबर से सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के वर्क फ्रॉम होम रहेंगे। एमसीडी के दफ्तर सुबह 8:30 से शाम 5 बजे तक और दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10 से शाम 6:30 बजे तक चलेंगे। ताकि व्यस्ततम समय में वाहनों की संख्या और उनसे होने वाले उत्सर्जन को कम किया जा सके।
निर्माण पर दो चरणों में रोक
1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल उड़ाने वाली तोड़फोड़ और खुले में होने वाले सिविल निर्माण पर रोक रहेगी। इसके बाद 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक सभी प्रकार के निर्माण और तोड़फोड़ कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध लागू होगा। निर्माण स्थलों पर 100 प्रतिशत सीसीटीवी कवरेज अनिवार्य होगी और नक्शा पास कराने के लिए मलबे एप पर पंजीकरण जरूरी होगा।
334 टीमें करेंगी 24 घंटे निगरानी
प्रदूषण फैलाने वालों पर कार्रवाई के लिए 334 प्रवर्तन टीमें तैनात होंगी। इनमें 256 वार्ड टीमें और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की 78 टीमें शामिल हैं। इन्हें पीटीजेड कैमरों, जियो-टैग और टाइम-स्टैम्प आधारित निगरानी व्यवस्था का सहारा मिलेगा। 1 अक्तूबर से एआई-सक्षम कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी पूरी तरह सक्रिय होगा।
हॉटस्पॉट
पर सीएम, मंत्री भी करेंगे निगरानी
दिल्ली के 37 एयर क्वालिटी और ट्रैफिक हॉटस्पॉट पर मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद और नोडल अधिकारी साप्ताहिक निरीक्षण करेंगे। प्रत्येक हॉटस्पॉट के तीन किलोमीटर के दायरे को निगरानी में रखा जाएगा। 15 प्रमुख सड़क हिस्सों को सिग्नल फ्री और जाम मुक्त बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है, जिनमें आठ का काम पूरा हो चुका है।
3065 किमी सड़कों से हटाएंगे धूल
सरकार ने 2026 में 3,065 किलोमीटर सड़कों से धूल मिटाने का लक्ष्य तय किया है, सड़कों के पैच ठीक करने हैं। 20 सितंबर तक 1,193 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है और 1,872 किलोमीटर पर काम जारी है। मशीनों से सफाई, पानी का छिड़काव, पक्की सतह, फुटपाथ सुधार और खाली जमीन पर हरियाली बढ़ाने पर भी जोर रहेगा।
पार्किंग फीस दो गुनी, सार्वजनिक परिवहन पर फोकस
निजी वाहनों का इस्तेमाल कम करने के लिए अधिकृत पार्किंग स्थलों का शुल्क दोगुना किया है। मेट्रो पार्किंग इससे बाहर रहेगी। दिल्ली में बसों की संख्या 6,840 हो गई है, जिसमें 5088 ई-बसें हैं। सरकार का लक्ष्य रोजाना मेट्रो यात्रियों की संख्या 72 लाख और डीटीसी की सवारी 42 लाख तक पहुंचाना है। लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए दिल्ली मेट्रो सारथी एप को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
उद्योगों पर भी कार्रवाई, 2,283 इकाइयां बंद या सील
सरकार ने दिसंबर 2025 से 26 सितंबर 2026 के बीच 11,271 औद्योगिक इकाइयों के सर्वेक्षण किए, जिनमें 2,283 प्रदूषणकारी इकाइयों को बंद या सील किया गया। इनमें 1,665 इकाइयां वायु प्रदूषण और 618 जल प्रदूषण से जुड़ी थीं। आगे भी प्रदूषणकारी उद्योगों पर कार्रवाई और एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस की निगरानी जारी रहेगी।
60 स्टेशन बताएंगे कहां बढ़ रहा प्रदूषण
दिल्ली में वायु गुणवत्ता की निगरानी का नेटवर्क भी बढ़ाया जाएगा। सीएएक्यूएमएस स्टेशनों की संख्या 47 से बढ़ाकर 60 की जाएगी और 13 नए स्टेशन लगाए जाएंगे। सरकार का कहना है कि इससे स्थानीय स्तर पर प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान और वहां लक्षित कार्रवाई तेज होगी। खुले में कूड़ा जलाने की शिकायत 311 और ग्रीन दिल्ली ऐप के जरिए की जा सकेगी।
दिल्ली के बाहर का प्रदूषण भी एजेंडे में
पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि दिल्ली के प्रदूषण को पूरे एनसीआर के एयरशेड के संदर्भ में देखना होगा। सरकार के आकलन के मुताबिक करीब 30 प्रतिशत प्रदूषण दिल्ली क्षेत्र में पैदा होता है, जबकि 60 से 65 प्रतिशत आसपास के क्षेत्रों से आता या प्रभावित होता है। दिल्ली अपने हिस्से के हर प्रदूषण स्रोत पर कार्रवाई करेगी, लेकिन स्थायी सुधार के लिए पूरे एनसीआर में समन्वित कार्रवाई जरूरी है।
जनता भी बनेगी क्लीन-एयर पार्टनर
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्लीवासियों से सार्वजनिक परिवहन अपनाने, कार पूलिंग करने, वैध पीयूसीसी रखने, कूड़ा नहीं जलाने और प्रदूषण की शिकायत करने की अपील की। सरकार ने साफ किया है कि इस बार विंटर प्लान का जोर केवल प्रदूषण बढ़ने के बाद कार्रवाई पर नहीं, बल्कि पहले से रोकथाम, निगरानी और जवाबदेही तय करने पर है।