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डीजल वाहनों पर बैन से होगा भारी नुकसान

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अगर नए और महंगे डीजल वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगी तो नोएडा परिवहन विभाग को करीब 40 फीसदी राजस्व का नुकसान होगा। डीजल की महंगी कारों से मिलने वाला राजस्व सबसे ज्यादा प्रभावित होगा।
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हालांकि एनजीटी के आदेश से यह साफ नहीं है कि नए डीजल वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर प्रतिबंध के आदेश में दिल्ली के अलावा एनसीआर के शहर शामिल हैं या नहीं। बावजूद इसके परिवहन विभाग का यह मानना है कि प्रदूषण को समाप्त करने के लिए हर संभव प्रयास होने चाहिए।

नोएडा में 10 लाख रुपये से ज्यादा कीमत के वाहनों पर 10 फीसदी का टैक्स चुकाना होता है। वहीं 10 लाख रुपये से कम कीमत वाले वाहनों की खरीद पर रजिस्ट्रेशन के दौरान 8 फीसदी टैक्स देना होता है। टैक्स का यह स्लैब डीजल और पेट्रोल दोनों तरह के वाहनों पर लागू होता है।
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हर वर्ष बढ़ रहे हैं 10 फीसदी रजिस्ट्रेशन

नोएडा परिवहन विभाग ने 1 जनवरी 2015 से 11 दिसंबर 2015 तक 37,000 पेट्रोल वाहनों का रजिस्ट्रेशन किया। वहीं, डीजल वाहनों के रजिस्ट्रेशन के मामले में यह आंकड़ा 9950 रहा। लेकिन खास बात यह कि डीजल वाहनों से मिलने वाले टैक्स का आंकड़ा करीब 40 फीसदी होता है।

वजह, महंगी डीजल गाड़ियों की खरीद पर रजिस्ट्रेशन और टैक्स के रूप में मिलने वाले राजस्व का अधिक होना है। अधिकारियों की मानें तो शहर में महंगी डीजल गाड़ियों के खरीदार बड़ी संख्या में हैं। इनसे विभाग को करीब 40 फीसदी राजस्व मिलता है। हालांकि इनकी संख्या कम है।

इसके अलावा प्रत्येक वर्ष ऐसे वाहनों के रजिस्ट्रेशन कराने वाले वाहन मालिकों की संख्या 10 फीसदी बढ़ रही है। लिहाजा यह राजस्व आंकड़ा भी बढ़ रहा है। अधिकारी यह कयास लगा रहे हैं कि दिल्ली में प्रतिबंध लगाने के बाद नोएडा भी इससे अछूता नहीं रह पाएगा।
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डीजल की महंगी कारें और उनकी कीमत

- मर्सिडिज: 1 करोड़
- फॉर्च्यूनर: 30 लाख
- एक्सयूवी500: 14 लाख
- बोलेरो: 10 लाख
- स्कॉर्पियो: 14 लाख
-अमेज: 10 लाख
- सियाज: 11 लाख
नोट: सभी कारों की कीमत लगभग में हैं

नोएडा में महंगे डीजल वाहनों के रजिस्ट्रेशन और टैक्स से करीब 30-40 फीसदी राजस्व आता है। बावजूद इसके अगर एनजीटी का आदेश एनसीआर को लेकर भी आता है तो उसकी तामिल होगी। प्रदूषण को समाप्त करने के लिए सभी प्रयास होंगे।- राजेश सिंह, एआरटीओ (प्रवर्तन)
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