राजधानी में कोरोना संक्रमितों की संख्या पांच लाख के आंकड़े को छूने के लिए तैयार है। इस बीच रोजाना होने वाली मौतों के आंकड़े भी रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रहे हैं। दिल्ली के प्रमुख कोविड अस्पतालों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, बीते एक माह में कोरोना से मरने वालों में 80 फीसदी लोग 45 साल की उम्र के पार थे। इनमें से अधिकतर मरीज पहले से ही किसी बीमारी से पीड़ित थे। इसके अलावाइलाज के लिए देरी से अस्पताल पहुंचना भी मौतों का एक बड़ा कारण रहा।
राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के कोविड नोडल अधिकारी डॉक्टर अजीत जैन बताते हैं कि अस्पताल में एक माह में हुई मौतों में 80 फीसदी मरीज 45 साल से ज्यादा के थे, और पहले से ही हृदय, डायबिटीज, किडनी और फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित थे। डॉ. जैन ने कहा कि इस आयु वर्ग में सबसे अधिक मौतें होने का बड़ा कारण है यह है कि इन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से ही बीमारी से लड़ती रहती है। ऐसे में वायरस मरीज के शरीर में प्रवेश कर कई अंगों को नुकसान पहुंचाने लगता है और इस कारण व्यक्ति की मौत हो जाती है।
एलएनजेपी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर सुरेश ने कहा कि कोरोना से होने वाली मौतों में करीब 20 फीसदी लोग 45 से कम उम्र के हैं वहीं, 80 फीसदी 45 पार हैं। उन्होंने कहा कि हाई रिस्क समूह में आने वाले लोगों को कोरोना के किसी भी तरह के लक्षण महसूस हों तो तुरंत जांच करानी चाहिए। टेस्ट कराने में लापरवाही घातक साबित हो सकती है। अस्पताल के एक डॉक्टर ने कहा कि एक माह में करीब 40 लोगों की मौत हुई है। इनमें से 25 से ज्यादा मरीज पहले से ही किसी बीमारी से पीड़ित थे।
साकेत के मैक्स अस्पताल के डॉक्टर विवेक का कहना है कि इस समय अधिकतर मरीज गंभीर हालत होने पर अस्पताल पहुंच रहे हैं। ऐसे मरीजों को तुरंत आईसीयू और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा जा रहा रहा है। अस्पताल में एक माह में हुई मौतों में सबसे अधिक संख्या पहले से बीमार मरीजों की हैं। इनमें भी अधिकतर 45 साल से ज्यादा उम्र के हैं।
अस्पताल पहुंचने के 24 घंटे के भीतर ही हो रही मौतें
डॉ. अजीत जैन ने कहा कि इस समय होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीज काफी लापरवाही बरत रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि वह संक्रमण से आसानी से ठीक हो जाएंगे। बुखार बढ़ने या तबीयत खराब होने पर वे डॉक्टरी सलाह लिए बिना खुद ही दवा ले रहे हैं। हालत गंभीर होने पर ही अस्पताल का रूख कर रहे हैं। ऐसे में इन मरीजों की जान बचाना काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। कई मरीज तो ऐसे थे, जिनकी मौत अस्पताल पहुंचने के 24 घंटे के भीतर ही हो गई।
इन बातों का रखें खास ख्याल
सर गंगा राम अस्पाल के डॉक्टर धीरेन गुप्ता का कहना है कि पहले से बीमार लोगों को इस समय काफी सावधानी बरते ही जरूरत है। इस मौसम में हर प्रकार का संक्रमण तेजी से फैलता है। साथ ही बढ़ते प्रदूषण के कारण भी लोगों को कई प्रकार की समस्याएं हो रही है। इसलिए जरूरी है कि हाइ रिस्क वाले लोग बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें। संक्रमण से बचाव के सभी नियमों का पालन करें और बहुत आवश्यक होने पर ही घर से निकलें।