पुलिस का कहना है कि तीन दिन की पूछताछ में उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिल गए हैं। उसने बताया कि जब सीएए के विरोध में जगह-जगह धरना-प्रदर्शन हुए तो उसके लगा कि यह अध्यादेश उसके मजहब पर खतरा है। जनवरी-2020 में अध्यादेश अधिनियम बन गया तो उसने ठान लिया कि वह इसका बदला अपने तरीके से लेगा। वह आनलाइन गेमिंग एप में महारथी था। उसने इसी को अपना हथियार बनाया और दूसरे धर्मों को किशोरों का धर्मांतरण कराने में लग गया। उधर, तीन दिन की रिमांड पूरी होने पर बद्दो को सोमवार को जेल भेज दिया गया। इससे पहले उसकी वीडियो कांफ्रेंसिंग से अदालत में पेशी हुई। अगली सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख लगी है।
पाकिस्तानी कनेक्शन छिपाने के लिए बोला झूठ
बद्दो का पाकिस्तान के लोगों के साथ मोबाइल पर संपर्क रहा है। उसके मोबाइल की काल डिटेल से पुलिस को इसके साक्ष्य मिल गए। इस पर पर्दा डालने के लिए उसने झूठ बोला कि उसकी दादी और मां पाकिस्तान की हैं। पुलिस की पड़ताल में इसका खुलासा हो गया। उसकी इंस्टाग्राम आईडी में पुलिस एक ऐसा ग्रुप मिला है जिसमें चार पाकिस्तानी युवक जुड़े थे। बद्दो ने उन्हें बताया था कि वह चार लोगों का धर्मांतरण करा चुका है। पुलिस ने इस संबंध में बद्दो से सवाल किया तो उसने गेमिंग एप के जरिये ही उनसे दोस्ती होने की बात कही। अधिक जानकारी के लिए पुलिस ने इंस्टाग्राम को पत्र लिखकर युवकों के बारे में जानकारी मांगी है।
मस्जिद कमेटी के सदस्यों से की पूछताछ
अब पुलिस ने संजयनगर स्थित मस्जिद कमेटी से पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस अभी तक 15 सदस्यीय कमेटी में से तीन सदस्यों से पूछताछ कर चुकी है। सभी इस संबंध में जानकारी होने से इन्कार कर रहे हैं। मई में धर्मांतरण का मामला उजागर होने के बाद प्रारंभिक पूछताछ के दौरान पुलिस को कमेटी ने कुछ समय पहले कमेटी के सदस्य अब्दुल रहमान को निकाले जाने की जानकारी दी थी लेकिन उसके निकाले जाने के बाद भी वह कमेटी में सक्रिय पाया गया। पुलिस ने अब कमेटी के सदस्यों से फिर से पूछताछ की और निकाले जाने के बाद अब्दुल के सक्रिय होने पर सवाल किया तो सभी चुप्पी साध गए। मामले में पुलिस अन्य सदस्यों से एक-एक कर पूछताछ करने में जुटी है। अब्दुल रहमान भी धर्मांतरण केस में नामजद आरोपी है।
कई सवालों के जवाब मिले
डीसीपी निपुण अग्रवाल का कहना है कि बद्दो की रिमांड पर कई सवालों के जबाव मिल गए हैं। आगे की जांच के लिए इंस्टाग्राम समेत नेटवर्क कंपनियों से जानकारी मांगी गई है। मस्जिद कमेटी के सदस्यों से भी पूछताछ की जा रही है।