राजस्थान और यूपी के हरियाणा के पंचायत चुनावों में फर्जी प्रमाण पत्र बनाने का भंडा फोड हुआ है। जिन स्कूलों के नाम पर विद्यार्थियों का पंजीकरण राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान भारत सरकार के पास है उन स्कूलों में संबंधित विद्यार्थियों के कोई दस्तावेज नहीं हैं।
आरटीआई में भी इस बात के पुख्ता दस्तावेज सामने आऐं। तभी तो फर्जी प्रमाणपत्रों के दम पर सरपंच, ब्लॉक समिति और जिला पार्षद चुने गये प्रतिनिधियों के संबंध में दिल्ली उच्च न्यायालय ने एचआरडी मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
ये आदेश आवाम एजूकेशनल एंड डवलपमेंट सोसायटी की अर्जी पर हाईकोर्ट ने वीपीसी 3682 एवं सीएम नबर 6564/2015 जारी किया है। इस मामले में राजस्थान पुलिस ने मेवात के दर्जनों लोगों से पूछताछ की और कई लोगों को जेल में भी जाना पड़ा था। आरटीआई में स्कूलों और मदरसों के नाम पर अनेकों प्रमाणपत्र एनआईओएस ने जारी किये हैं।
जबकि इन स्कूलों में कभी उन बच्चों ने दाखिला ही नहीं लिया। राजस्थान राज्य के हनुमानगढ़ जिले के गांव गोगामेड़ी के आरटीआई कार्यकर्ता राजाराम खोथ की आरटीआई के जवाब में एनआईओएस ने जवाब दिया कि शैक्षणिक सत्र 2009-10 के तहत 52414, 2010-11 में 32784, 2011-1 में 20623, 2012-13 में 16792, 013-14 में 15289 दसवीं कक्षा के सर्टिफिकेट बनाऐं गये जो फर्जी नहीं हैं।
नोएडा एनआईओएस बोर्ड के पास विद्यार्थियों से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं होना इन प्रमाणपत्रों में फर्जीवाडे़ की ओर ईशारा करता है। वहीं मेवात जिले में अब तक जिला प्रशासन द्वारा बनाई गई कमेटी के पास फर्जी कागजात पर पंचायत प्रतिनिधि बनने की 113 शिकायतें आई हैं।