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पॉलिटिक्स का शिकार हो गई ये योजना!

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एनसीआर ऑटो परमिट योजना को रफ्तार देने में दिल्ली ने यूपी और हरियाणा को पीछे छोड़ दिया है।
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दिल्ली में परमिट के लिए आवेदन का सिलसिला तेज हो गया है, लेकिन यूपी-हरियाणा में यह योजना सरकारी फाइलों में अटकी हुई है। तीनों राज्यों के बीच औपचारिक समझौता होने के बाद ही यह योजना आगे बढ़ेगी।

एनसीआर ऑटो परमिट योजना को लेकर भले ही तीनों राज्यों में सहमति बन गई हो, लेकिन औपचारिक समझौता जब तक नहीं होगा तब तक किसी भी राज्य का ऑटो एक-दूसरे की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकेगा।
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दिल्ली की राजनीति से अटकी योजना

मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर के लिए अब तक तीनों राज्यों के परिवहन विभाग में अब तक कोई बातचीत नहीं हुई है।

पिछले साल ही ऑटो परमिट योजना को रफ्तार मिलनी थी, लेकिन दिल्ली की राजनीतिक खींचतान में यह योजना उलझकर रह गई है। कभी दिल्ली के विधानसभा चुनाव तो कभी लोकसभा चुनाव से यह योजना अटकी हुई है।

हालांकि, लोकसभा चुनाव से पहले ही दिल्ली की तरफ से परमिट के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, लेकिन उत्तर प्रदेश और हरियाणा समझौता होने का इंतजार कर रहा है।
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चुनाव बाद होगा फैसला!

आरटीओ गाजियाबाद दिल्ली के लिए परमिट जारी करेगा। नियमानुसार जितने परमिट दिल्ली से यूपी के लिए जारी होंगे, उतने ही परमिट यूपी से दिल्ली के लिए जारी होंगे। लेकिन अब तक नोएडा और गाजियाबाद से परमिट की संख्या निर्धारित नहीं हो सकी है।

एआरटीओ (प्रवर्तन) राजेश सिंह ने बताया कि एनसीआर ऑटो परमिट योजना को लेकर एमओयू बाकी है। चुनाव बाद ही यह प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी। सहमति बनते ही उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग परमिट की प्रक्रिया पर काम शुरू कर देगा।
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