इसी 20 अक्टूबर को दिल्ली से सटे फरीदाबाद के सुनपेड़ गांव में एक दलित परिवार के चार सदस्यों को जिंदा जलाने की कोशिश और इसमें दो मासूम बच्चों की मौत ने पूरे देश को सकते में ला दिया था।
फिलहाल इस मामले की जांच सीबीआई के हवाले कर दी गई है। इस घटना की अब तक की जांच में फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
इंडियन एक्सप्रेस ने मुताबिक दलित परिवार के घर में जो आग लगी वो बाहर से नहीं, घर के अंदर से ही लगाई गई। जांच दल को कमरे से ज्वलनशील पदार्थ की आधी जली हुई प्लास्टिक बोतल और आधा जला बेड व माचिस की तीली कमरे की खिड़की के स्लैब से मिली है।
फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री के डायरेक्टर और सहयोगी डायरेक्टरों की एक टीम करनाल से सुनपेड़ पहुंची और वो सभी इस बात पर सहमत है कि आग घर के अंदर से ही लगी थी।
जांच दल के विश्वस्त सूत्र ने बताया कि जिस वक्त ये घटना हुई उस वक्त किसी के बाहर से अंदर आने के कोई सुबूत नहीं मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार दलित महिला पर जिस ढंग से ज्वलनशील पदार्थ छिड़का गया वो कमरे के बाहर से फेंके जाने की पुष्टि नहीं करता।
कैसे छेद में से निकला बच्चा
जांच दल का कहना है कि जिस तरह तेल डाला गया है उस तरह किसी के लेटे होने पर नहीं डाला जा सकता है। विशेषज्ञों का तो ये भी कहना है कि तेल के छींटे गोलाई में पड़े हैं जो दूर से फेंके जाने पर संभव नहीं हैं।
इस तरह से तेल तभी डाला जा सकता है जब कोई अंदर ही रहा हो और उसने पहले तेल डाला फिर आग लगाई। पीड़ित परिवार के घर में दो कमरे हैं।
जितेंद्र ने अपने बयान में ये दावा किया है कि उसने आग लगने के दौरान अपने बच्चों को एक कमरे से दूसरे कमरे में उस छेद के माध्यम से किया जो दूसरे कमरे को निकलता है।
दीवार फांदने के भी नहीं मिले सबूत
हालांकि, विशेषज्ञ इस दावे को भी नकार रहे हैं। उनका कहना है कि छेद इतना बड़ा नहीं है कि उसमें से किसी को बाहर निकाला जा सके। एफएसएल की टीम ने अपनी जांच में ये भी पाया है कि दरवाजा अंदर से ही बंद था।
इस निष्कर्ष पर टीम इस तरह पहुंची कि दरवाजे के कुंडों पर ही एश ट्रे रखी थी इस तरह ये कहा जा सकता है कि दरवाजा अंदर से बंद था।
जांच टीम ने ये भी पाया कि जिस खिड़की से ज्वलनशील पदार्थ फेंके जाने की बात की जा रही है वो खिड़की बंद थी लेकिन उसमें कुंडी नहीं लगी थी।
बात दें कि जितेंद्र ने राजपूत परिवार के 11 लोगों पर दीवार फांदकर उसके घर में घुसकर आग लगाने का आरोप लगाया है। जांच टीम का कहना है कि अगर कोई दीवार फांदेगा तो उस क्षेत्र में कुछ हलचल जरूर होगी लेकिन टीम को ऐसा कुछ भी देखने को नहीं मिला।