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अटाली: पंचायत चुनाव ने पाट दी दिलों की दूरी, शांति बहाल

Wed, 10 Feb 2016 06:33 PM IST
मुकेश शर्मा/ अमर उजाला, फरीदाबाद
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सांप्रदायिक दंगे की आग में झुलस चुके गांव अटाली में अब शांति व सद्भाव दिखाई देने लगा है। पंचायत चुनाव ने दोनों समुदाय के दिलों की दूरियों को पाटकर शांति की राह बना दी है।
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इस कारण अब गांव के पलायन कर चुके अधिकांश अल्पसंख्यक परिवार गांव लौट आए है। उन्होंने दोबारा से गांव में कई महीनों से बंद दुकानों को खोल दिया है। जहां अब सांप्रदायिक भेदभाव की बदबू नहीं आती।

अटाली में वर्षो साथ रहे बहुसंख्यक और अल्पसंख्यकों के बीच धार्मिक स्थल को लेकर विवाद था। 25 मई को गांव में दोनों समुदाय के लोगों के बीच झड़प हुई और वे गांव छोड़ कर थाना शहर परिसर में बने राहत शिविर में चले गए।
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गांव के प्रमुख लोगों द्वारा मान-मनौव्वल करने के बाद अल्पसंख्यक परिवार दोबारा गांव पहुंचे। लेकिन एक जुलाई को हुए पथराव की घटना ने दोनों समुदायों में दूरी बढ़ा दी।

दो जुलाई को अधिकांश परिवारों ने गांव से पलायन कर रिश्तेदारियों में शरण ले ली। घटना पर जमकर राजनीति हुई। लेकिन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के हस्तक्षेप के बाद दोनों समुदाय के बीच समझौता हुआ।

समझौते के बाद अल्पसंख्यक परिवारों ने राहत की सांस ली और गांव की तरफ रूख किया। 10 जनवरी को हुए पंचायत चुनाव ने दिलों की दूरी को खत्म करने का काम किया।

ऐसा माना जा रहा था कि पंचायत चुनाव धार्मिक स्थल के समर्थन-विरोध में होगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए शुरुआत में चुनाव आयोग ने गांव में चुनाव रद्द कर दिए थे लेकिन दोबारा अधिसूचना में चुनाव कराए गए।

गांव को अतिसंवेदनशील माना गया। सभी चर्चाओं पर विश्राम लगाते हुए पंचायत चुनाव शांतिपूर्वक संपन्न हुए। चुनाव के दौरान दोनों समुदाय के लोग ने एक-दूसरे के घरों पर दस्तक दी, जिससे सौहार्द बढ़ा।

पंचायत चुनाव का विरोध करने वाले हाजी शाकिर पंच के पद पर जरूर जीते। लेकिन ब्लॉक समिति पद पर खड़े उम्मीदवार की जमानत भी नहीं बचा पाए।

अब पहले जैसा माहौल
भले ही अभी भी एतियात के तौर पर गांव में आरपीएफ और हरियाणा पुलिस के जवान तैनात है। लेकिन अब माहौल में दहशत की बजाय शांति दिखाई दे रही है।

करीब सात महीने के बाद अब लोग गांव में अपनी पूराने काम-धंधे खोल दिए है। जहां बहुसंख्यक बिना किसी भेदभाव के खरीददारी करते है। नाई की दुकान चलाने वाले शौकिन कहते है कि पहले जैसा माहौल नहीं है।
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