बल्लभगढ़ के अटाली गांव में हुए दंगे से प्रभावित परिवार पिछले आठ महीने से मुआवजे के लिए भटक रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि जिला प्रशासन कुछ लोगों के निर्देश पर काम कर रहा है। दंगे के आठ महीने बीत जाने के बाद भी करीब 35 परिवारों को उचित मुआवजा नहीं मिल पाया है। जिसके कारण उनकी परिवार के भूखे मरने की नौबत आ गई है।
धार्मिक स्थल निर्माण को लेकर गांव के बहुसंख्यक और अल्पसंख्यकों के बीच संघर्ष हो गया था। इस घटना में उपद्रवियों ने 19 घरों के साथ गांव के बाहर बोगे और बिटोरों में आग ला दी थी। इस आगजनी में चार बहुसंख्यक परिवारों के साथ करीब 15 अल्पसंख्यक परिवारों के बौगे-बिटोरों में आग ली थी।
आगजनी पर महरम लगाते हुए जिला प्रशासन ने रिपोर्ट बनाकर सरकार को रिपोर्ट भेजी थी। लेकिन इसके बावजूद आज तक इन परिवारों को मुआवजा नहीं मिल पाया। मुख्यमंत्री ने दोनों समुदाय के बीच समझौता कराने के कारण अब गांव में शांति है लेकिन प्रशासन की अनदेखी के कारण अभी भी पीड़ित परिवार मुआवजे के लिए कार्यालयों के चक्कर लगा रहे है।
पीड़ित श्याम, किशन, अमर सिंह, सुबसुख, शहीद, शौकिन, रूसतम, शाबिर, अमीना, सानू, फिरोज, झम्मन, जाबू, जाखर ने बताया कि दंगे के समय उनके बौगे-बिटोड़ों में उपद्रवियों ने आग ला दी। साल भर की मेहनत राख हो गई। प्रशासन ने अभी तक उनकी सुध नहीं ली। पीड़ित अनिता ने बताया कि उसका सात फेर का बौगा था। जिसकी कीमत 50 से 60 हजार थी। लेकिन प्रशासन ने सिर्फ 18 हजार रुपए का मुआवजा दिया।