कोई आपसे कहे कि पार्लर में जाकर अब न केवल खूबसूरती बढ़ेगी, बल्कि ग्रहों की शांति भी संभव हो पाएगी तो हैरत में ना पड़ें। ऐसा संभव हुआ है एस्ट्रोजेम थेरेपी से। शहर के पार्लरों में इन दिनों इसका चलन तेजी से बढ़ा है।
ब्यूटी ट्रीटमेंट के लिए पार्लर आने वालों की मांग पर उनकी राशियों के अनुसार फेशियल और मसाज आदि किया जा रहा है। सेक्टर-21 स्थित पार्लर प्रबंधक मनवीत कौर ने बताया कि अभी इस थेरेपी को 10-12 फीसदी महिलाएं अपना रही हैं।
उन्हें उनके जन्म महीने के अनुसार एस्ट्रोजेम थेरेपी दी जा रही है। एक पंथ दो काज के लिए वह पैसे खर्च करने में भी पीछे नहीं है। यहां आने वाली ज्यादातर महिलाएं फेशियल को प्राथमिकता देती हैं।
क्या है एस्ट्रोजेम थेरेपी
एस्ट्रोजेम थेरेपी में पार्लर आने वाली महिलाओं का ट्रीटमेंट विभिन्न स्टोन के भस्म से तैयार ब्यूटी प्रोडक्ट से किया जाता है। इसमे स्क्रब, मसाज क्रीम, लोशन, मास्क आदि शामिल हैं।
हालांकि पार्लर आने वाली महिलाएं इसमें फेशियल का इस्तेमाल सबसे ज्यादा करती हैं। इसके जरिए शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
हालांकि रत्न पहनना तो फैशन बन गया है पर अभी भी कुछ लोग ऐसे हैं जो इसे नहीं पहनना चाहते। उन महिलाओं के लिए ये कारगर थेरेपी है। पार्लर आने वाली ऐसी ही महिलाओं को ये थेरेपी दी जा रही है। उन्हें रत्न पहनने की झंझट के बगैर ही सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
-नीलू पांडेय, पार्लर संचालिका
वैदिक काल से है मान्य है एस्ट्रोजेम
मणिरत्नों को वैदिक काल से ही मान्यता मिली है। कहा जाता है कि रत्नों के इस्तेमाल से ग्रहों के नकारात्मक ऊर्जा की शांति होती है। वह हमारे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का भी संचार करते हैं।
-अशोक सनोरिया, एस्ट्रोलाजर
किस महीने में कौन से फेशियल का इस्तेमाल
महीना-------------------------------------------फेशियल
जनवरी, फरवरी, मार्च----------------------------एमराल्ड
अप्रैल, मई जून----------------------------------रूबी
जुलाई, अगस्त, सितंबर--------------------------सफायर
अक्तूबर, नवंबर, दिसंबर---------------------------टोपाज