उत्तरी-पूर्वी जिले में हुई हिंसा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 48 हो गई है। जीटीबी अस्पताल में उपचार के दौरान 18 वर्षीय आकिब की सोमवार को मौत हो गई। उसे 24 फरवरी को जीटीबी में भर्ती कराया गया था। उसके परिजन मुश्ताक ने बताया कि 24 फरवरी की शाम को भजनपुरा में हुई हिंसा में आकिब के सिर में चोट लगी थी और उसे जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
डॉक्टरों ने जांच के दौरान कहा था कि आकिब के सिर में खून जम गया है, इसलिए ऑपरेशन करना होगा। उपचार के दौरान ही सोमवार देर रात आकिब की मौत हो गई। मंगलवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद आकिब का शव परिजनों को सौंप दिया गया। अब भी 6 शवों की पहचान बाकी है।
उपद्रवियों से बचने के लिए घरों के बाहर बदले नेमप्लेट
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान उपद्रवियों से घरों को बचाने के लिए कई लोगों ने नेमप्लेट बदल दिए थे। मिश्रित आबादी वाले इलाके में दोनों समुदाय के लोग खुद को बचाने के लिए इस तरह का कार्य कर सुरक्षित जगह चले गए थे। शिव विहार इलाके के निवासी 32 वर्षीय दीपक राजोरा 24 फरवरी को हिंसा शुरू होने पर अपने रिश्तेदार के घर गाजियाबाद चले गए थे। उन्होंने बताया कि घर छोड़ने से पहले मैंने अपने पिता के नाम का नेमप्लेटहटा दिया था। उन्हें देखकर मोहल्ले के दूसरे लोगों ने भी नेमप्लेट बदलने शुरू कर दिए थे। इससे पहले उपद्रवियों ने गली के दूसरे मकानों को आग के हवाले कर दिया था। कुछ इसी तरह अकरब सईद ने अपनी फर्नीचर की दुकान को बचाने के लिए होर्डिंग को हटा लिया था। उनके शोरूम के बाहर इकबाल फर्नीचर के नाम से बोर्ड लगा हुआ था।
पूर्वी दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में सबसे ज्यादा घायल और मरने वालों के शव पहुंचे थे। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन ने एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसके अनुसार 23 फरवरी की रात से अब तक 279 घायलों का उपचार किया गया है। इनमें से 67 को गोली लगी थी। 154 लोगों को मारपीट के बाद जलाया गया था। 58 लोग अन्य तरह की चोटों के कारण अस्पताल पहुंचे थे।
अस्पताल की इस रिपोर्ट में उम्रवार भी घायलों की जानकारी दी गई है। इसके अनुसार, सबसे ज्यादा घायल 20 से 25 और 30 से 35 वर्ष के बीच के हैं। 52 घायल 20 से 25 और 54 30 से 35 आयु वर्ग के थे। 10 से 15 वर्ष वर्ष के चार और 70 वर्ष से ज्यादा आयु के 5 घायल भी भर्ती हुए थे। 27 घायलों की आयु का पता अस्पताल नहीं लगा पाया था। जीटीबी अस्पताल में कुल 38 शवों का पोस्टमार्टम किया गया है। प्रबंधन सूत्रों के मुताबिक, यह रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी।
दिल्ली में हुई हिंसा में अब तक 48 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 600 से ज्यादा घायल हुए। जीटीबी अस्पताल के अलावा 52 घायल लोकनायक अस्पताल पहुंचे थे। 350 घायलों के उपचार का दावा अल हिंद अस्पताल ने भी किया है। लोकनायक अस्पताल में उपचार कराने वालों में 60 फीसदी मामले हड्डी टूटने और 20 फीसदी पत्थर-डंडों से मारपीट के थे। 20 फीसदी घायलों को तेजाब से जलाया गया था। अस्पतालों की रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा में पत्थरों, डंडों, तेजाब, पेट्रोल, बंदूकों, चाकुओं और तलवारों सहित धारदार हथियारों का काफी इस्तेमाल किया गया था। इसके चलते सबसे ज्यादा गंभीर मरीज अस्पतालों में दाखिल हुए थे।