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Delhi NCR News: पंजाब पुलिस की कार्रवाई पर विधानसभा अध्यक्ष का सख्त रुख, मामला विशेषाधिकार समिति को सौंपा

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अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने पंजाब पुलिस के जवाब को बताया असंतोषजनक और दुर्भाग्यपूर्ण
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। विधानसभा के अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने पंजाब पुलिस की गई कार्रवाई से जुड़े मामले को विस्तृत जांच और रिपोर्ट के लिए विधानसभा की विशेषाधिकार समिति को सौंप दिया है। निर्णय छह जनवरी को विधानसभा के पटल पर नेता प्रतिपक्ष आतिशी के बयानों के संदर्भ में पंजाब पुलिस की कार्रवाई को लेकर लिया है। इस मामले में दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा की गई शिकायत और पंजाब पुलिस की ओर से प्रस्तुत जवाबों पर विचार के बाद अध्यक्ष ने प्रथम दृष्टया सदन के विशेषाधिकार के उल्लंघन और अवमानना का मामला बनता हुआ पाया। यह विवाद तब सामने आया जब इकबाल सिंह की शिकायत पर पंजाब पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की और सार्वजनिक रूप से यह कहा कि दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही से संबंधित एक वीडियो क्लिप को संपादित या छेड़छाड़ कर प्रस्तुत किया गया है। चूंकि यह विषय सीधे तौर पर विधानसभा की कार्यवाही से जुड़ा हुआ है, इसलिए दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने पंजाब पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा था और यह स्पष्ट किया था कि विधानसभा की कार्यवाही से संबंधित किसी भी कार्रवाई से पहले अध्यक्ष को अवगत कराना आवश्यक है।
पंजाब के पुलिस महानिदेशक और जालंधर के पुलिस आयुक्त ने भेजे लिखित जवाबों में यह तर्क दिया गया कि पुलिस ने विधि के अनुसार कार्रवाई की है और यह मामला विधायी विशेषाधिकार के दायरे में नहीं आता। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष ने इन स्पष्टीकरणों को असंतोषजनक मानते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने यह भी नोट किया कि बार-बार मांग के बावजूद शिकायत, एफआईआर, सोशल मीडिया विशेषज्ञ की रिपोर्ट और फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला (पंजाब) की रिपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण दस्तावेज विधानसभा सचिवालय को उपलब्ध नहीं कराए गए।
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अध्यक्ष ने यह भी बताया कि दिल्ली की फॉरेंसिक साइंस प्रयोगशाला से प्राप्त स्वतंत्र रिपोर्ट से आतिशी का उद्धृत वक्तव्य वास्तव में सदन के पटल पर देने के बारे में स्पष्ट होता है। उन्होंने कहा कि प्राथमिकी दर्ज करने से पहले दिल्ली विधानसभा सचिवालय से तथ्यों का सत्यापन किया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। विशेषाधिकार समिति को निर्देश दिया गया है कि वह इकबाल सिंह, पंजाब के डीजीपी, जालंधर के पुलिस आयुक्त और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर अपनी रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत करें।
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