दिवाली में आतिशबाजी की तेज आवाज नवजात के दिमाग पर बुरा असर डालती है। आतिशबाजी की आवाज और उससे निकले केमिकल्स से वायु प्रदूषण बढ़ जाता है, इससे वातावरण में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिसका असर नवजात के दिमाग पर पड़ता है। यही नहीं पटाखों से बढ़े प्रदूषण के कारण अस्थमा के मरीजों की परेशानी भी बढ़ जाती है।
दिल्ली सरकार के भगवान महावीर अस्पताल के शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमन प्रताप सिंह ने बताया कि ज्यादा तेज आवाज से बच्चों के दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। आतिशबाजी से निकले केमिकल्स और धुएं की वजह से वातावरण में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।
ऑक्सीजन की कमी के कारण हृदय गति घटती-बढ़ती रहती है और पल्स रेट में भी उतार-चढ़ाव होता रहता है। ऐसे में नवजात के दिमाग पर असर पड़ने का खतरा रहता है। लिहाजा नवजात को जितना संभव हो तेज आवाज से बचाना चाहिए। गंगा राम अस्पताल के मेडिसिन विभाग के सीनियर कंसलटेंट डॉ. अतुल गोगिया ने बताया कि आतिशबाजी से निकला धुआं अस्थमा मरीजों के लिए खतरनाक होता है।
ज्यादा प्रदूषण से अस्थमा मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होती है। लिहाजा दिवाली के दिन उन्हें घर में ही रहने की कोशिश करनी चाहिए और अपनी दवा साथ रखनी चाहिए। ज्यादा दिक्कत होने पर चिकित्सक से तुरंत संपर्क करना चाहिए।