धानसभा की याचिका समिति ने शनिवार को आशा किरण होम का दौरा कर मौतों के मामले की जांच की। समिति के अध्यक्ष कुलदीप कुमार ने लोगों से बात कर वीडियो बनाए। उन्होंने कहा कि वीडियो को जल्द जारी किया जाएगा। बातचीत के दौरान लोगों बताया गया कि उन्हें पौष्टिक भोजन और उचित उपचार नहीं मिल रहा था।
वहीं, एलजी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि होम के प्रशासक राहुल अग्रवाल को अभी तक निलंबित नहीं किया गया है, जबकि राहुल भ्रष्टाचार के आरोप में पांच साल तक निलंबित रह चुके हैं। जांच की रिपोर्ट विधानसभा के स्पीकर को सौंपी जाएगी। उन्होंने कहा कि आशा किरण होम में इतनी अव्यवस्था और मौतें होने के बाद भी एलजी ने राहुल पर कार्रवाई नहीं की है। राहुल 2016 में एसडीएम थे। एसडीएम रहते हुए उन पर सीबीआई की जांच चल रही थी। उन्हें पांच साल तक निलंबित भी रखा गया। हमारी मांग है कि ऐसे अधिकारियों पर जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए। समिति के सभी सदस्यों को आशा किरण होम में जाने से रोका गया।
आखिर उन्होंने अंदर ऐसा क्या छिपाया हुआ है, जबकि याचिका समिति सांविधानिक अधिकार रखती है। हम ये पूरी रिपोर्ट विधानसभा के स्पीकर को सौपेंगे। ये विशेषाधिकार व कमेटी के सांविधानिक अधिकारों के उल्लंघन का मामला है। दिल्ली सरकार की मंत्री ने इस पर जांच के आदेश दे दिए हैं। समिति को शिकायत मिली, इसलिए याचिका समिति यहां जांच करने के लिए पहुंची है।
आशा किरण होम में हुई मौतों के मामले में शनिवार को मंत्री सौरभ भारद्वाज ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना पर अधिकारियों को बचाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि होम के लिए कुछ अधिकारियों से बात हुई तो पता चला कि प्रशासक और अधीक्षक की पोस्ट मलाईदार है। इसमें भ्रष्टाचार करने के बहुत अधिक अवसर हैं। इसमें रहने वाले लोगों के खाने व दवाइयों टेंडर और अन्य चीजों के लिए अनुबंध अधीक्षक और प्रशासक के अधीन ही होते हैं।
भारद्वाज ने कहा कि होम के प्रशासक राहुल अग्रवाल को बतौर एसडीएम 2016 में रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई ने जब राहुल के घर छापा मारा तो पत्नी ने सारा धन और जेवर छत पर टंकी के पास छिपा दिया था। अग्रवाल पांच साल निलंबित रहे। ऐसे में यदि हमारे पास किसी अधिकारी पर कार्रवाई करने का अधिकार ही नहीं रहेगा तो कार्रवाई कैसे होगी।
एलजी पर सवाल उठाते हुए भारद्वाज ने कहा कि ये सभी बातें सार्वजनिक तौर पर मौजूद हैं तो आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि भ्रष्ट अधिकारी को होम की जिम्मेदारी सौंपी गई।
एलजी ने प्रशासक को निलंबित क्यों नहीं किया। समाज कल्याण विभाग के सचिव विनोद तावले को अब तक निलंबित क्यों नहीं किया गया। राजेंद्र नगर में बेसमेंट में छात्रों की मृत्यु वाले हादसे में भी सारे सबूत सार्वजनिक तौर पर प्रस्तुत कर दिए गए। मुख्य सचिव को कई बार डी सिल्टिंग की रिपोर्ट प्रस्तुत करने व थर्ड पार्टी ऑडिट के लिए कहा गया, लेकिन कोई काम नहीं हुआ। उपराज्यपाल ने अब तक मुख्य सचिव को निलंबित क्यों नहीं किया।
डीडीए के नाले में गिरकर मां-बेटे की मौत हो गई, लेकिन एलजी ने डीडीए के अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की। आप विधायक दुर्गेश पाठक ने कहा कि एलजी ने जानबूझकर भ्रष्ट अधिकारी राहुल अग्रवाल को आशा किरण होम की जिम्मेदारी सौंपी, जबकि किसी अधिकारी को पद देने से पहले विजिलेंस जांच करता है।
आरोपों का खंडन करते हुए राजनिवास ने कहा कि आशा किरण होम के प्रशासक को दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग ने आंतरिक रूप से नियुक्त किया था। यह पूरी तरह से सीएम और विभाग के मंत्री के नियंत्रण में स्थानांतरित का विषय है। प्रशासक एलजी नियुक्त नहीं करते।
न्हें निश्चित रूप से तत्कालीन एलजी की मंजूरी के बाद 15 फरवरी 2021 को दानिक्स अधिकारी के रूप में समाज कल्याण विभाग में तैनात किया गया था। इसके बाद मंत्री ने उन्हें आशा किरण होम के प्रशासक के रूप में तैनात किया। आप सरकार के मंत्री व नेता एलजी को लेकर गलत सूचना जारी कर रहे हैं।
राजनिवास ने कहा कि राजकुमार आनंद के इस्तीफा देने के बाद से ही समाज कल्याण विभाग में कोई मंत्री नहीं है। जमानत पर बाहर आने के बाद सीएम अरविंद केजरीवाल ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने और एलजी को भेजने का समय निकाल लिया, लेकिन एक संवेदनशील विभाग में नया मंत्री नियुक्त करने के बारे में नहीं सोचा। इसके लिए किसी भी अन्य विभाग से ज्यादा राजनीतिक निगरानी की जरूरत होती है।