कहानियां की साझा
अरविंद केजरीवाल ने इस मौके पर कुछ कहानियां साझा की। केजरीवाल के मुताबिक, सबसे पहले मनीष सिसोदिया से मुलाकात हुई। मैं इंजीनियर भी हूं, तो मुझे थोड़ी बहुत कोडिंग करनी भी आती थी। इन्कम टैक्स में सीटिंग डिप्टी कमिश्नर था। इसलिए मैं उसका चेहरा नहीं बन सकता था। वरना ये लोग मुझे अंडमान भेज देते। केजरीवाल ने बताया कि इसके बाद उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी, इस्तीफा दे दिया। फिर 10 साल हमने दिल्ली में सुंदर नगरी और नंद नगरी की झुग्गियों में काम किया। इसके बाद सत्येंद्र जैन मिले। ये एक प्रोफेशनल आर्किटेक्ट हैं।
जाति नहीं, प्रदर्शन के आधार पर टिकट: केजरीवाल
केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में अपने सारे उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है। जब हम टिकट की घोषणा कर रहे थे, तो बातचीत में कभी यह नहीं आता कि कोई सीट इस जाति की है, इसलिए उस जाति को दे दो। केवल परफॉर्मेंस के आधार पर हमने टिकट दिए। हम केवल यह देखते हैं कि कौन काम कर रहा है। किसको जनता पसंद कर रही है। दिल्ली मॉडल ऑफ गवर्नेंस में ईमानदारी बहुत जरूरी है।