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'राजनीति' में फंसी केजरीवाल की पत्नी की नौकरी

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दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल के प्रतिनियुक्ति के आवेदन को पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने अस्वीकार कर दिया है।
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सूत्रों के मुताबिक, सत्तारूढ़ भाजपा पार्षदों के विरोध के चलते ऐसा किया गया। हालांकि, भाजपा पार्षदों ने राजनीतिक बदले की भावना से आवेदन रद्द कराने की बात से इनकार किया है।

आयकर विभाग में अधिकारी सुनीता केजरीवाल ने गत माह पूर्वी दिल्ली निगम में प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के प्रमुख (कर निर्धारक एवं समाहर्ता) पद पर डेपुटेशन पर आने के लिए आवेदन किया था। एक अन्य अधिकारी दीपक गुप्ता ने भी निगम के पास इसी बाबत आवेदन भेजा था।
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तो इस कारण से डर गई भाजपा?

सूत्रों के अनुसार, सुनीता का आवेदन आने पर अधिकारियों ने मामले को वरिष्ठ भाजपा पार्षदों को अवगत कराते हुए उनकी राय मांगी। आम तौर पर डेपुटेशन पर आने वाले अधिकारियों की नियुक्ति से पहले सत्तापक्ष की राय नहीं ली जाती।

अधिकारी फैसला लेने के बाद उस पर सत्तापक्ष की मुहर लगवाते हैं। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा पार्षदों ने अधिकारियों को सुनीता के नाम पर विचार करने से मना कर दिया।

उन्होंने कहा कि सुनीता की नियुक्ति होने से पूर्वी दिल्ली नगर निगम का मुख्यालय आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए सत्ता का केंद्र बन जाएगा। लिहाजा, भाजपाइयों ने सुनीता के बजाए दीपक गुप्ता के नाम को हरी झंडी दे दी। अब दीपक गुप्ता अगले सप्ताह निगम में प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के प्रमुख का कार्यभार संभालेंगे।
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क्या है प्रक्रिया

निगम में डेपुटेशन पर आने के लिए अधिकारी को आयुक्त के पास आवेदन करना होता है। इसके बाद आयुक्त की ओर से आवेदन के तहत पत्र बनाकर नियुक्तियां, पदोन्नतियां व अनुशासनात्मक मामले की समिति के अध्यक्ष के पास स्वीकृति के लिए भेजा जाता है। उनकी हरी झंडी मिलने के बाद मेयर से स्वीकृति लेने का प्रावधान है।

पूर्वी दिल्ली नगर निगम में भाजपा पार्षद संजय सुर्जन ने कहा कि राजनीतिक द्वेष की भावना से सुनीता केजरीवाल के आवेदन को रद्द नहीं किया गया। उनको प्रतिनियुक्ति पर लेने का फैसला कर लिया गया था। मगर उनके विभाग ने तत्काल उनको निगम में भेजने से मना कर दिया।

निगम इंतजार नहीं कर सकता था, क्योंकि प्रॉपर्टी टैक्स विभाग के प्रमुख का पद काफी समय से रिक्त पड़ा है। इस कारण उनकी नियुक्ति का निर्णय वापस लिया गया।
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