अरविंद केजरीवाल ने कैबिनेट सहयोगियों के साथ शुक्रवार शाम 5 बजे राजनिवास में उपराज्यपाल से मुलाकात की। इसमेें मुख्य सचिव के साथ मुख्यमंत्री आवास और पर्यावरण मंत्री के साथ दिल्ली सचिवालय में हुए दुर्व्यवहार के बारे में चर्चा की।
उपराज्यपाल ने घटना की निंदा करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उपराज्यपाल ने कहा कि कोई भी सरकार अपने नागरिकों को किए गए वादों को तब तक पूरा नहीं कर सकती, जब तक उनके कर्मचारी खुद को डरा व हतोत्साहित महसूस करेंगे।
लोकतंत्र एवं सभ्य समाज में हिंसा का कोई स्थान नहीं है। उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री से कहा कि चुनी हुई सरकार व नौकरशाही के बीच उपजे अविश्वास को दूर करने के लिये ठोस कदम उठाए। जिससे दिल्ली के विकास व आम लोगों के हित पर बुरा असर न पड़े।
दूसरी तरफ बैठक के बाद अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया कि बीते तीन दिनों से अधिकारी बैठकों में उपस्थित नहीं हो रहे हैं। इससे सरकार के कामकाज पर बुरा असर पड़ रहा है।
इस बारे में उपराज्यपाल से मुलाकात की। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि वह अधिकारियों को काम पर वापस लौटाने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। वहीं, कैबिनेट ने भी सहयोग का पूरा भरोसा दिया है। दिल्ली की बेहतरी के लिए सब मिलकर काम करेंगे।
बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया कि तीन दिन से अधिकारियों के बैठकों में न आने से काम नहीं हो रहा है। उपराज्यपाल से इस बारे में बात की गई।
एक लिस्ट भी उपराज्यपाल को दी गई। इस मौके पर उपराज्यपाल ने भरोसा दिया कि वह अधिकारियों से बात करेंगे। अधिकारियों से कहा जाएगा कि वह मंत्रियों के साथ काम करें।
कैबिनेट समेत मुख्यमंत्री ने भी भरोसा दिलाया कि आगे से कोई ऐसी घटना नहीं होगी, जिससे इस तरह की स्थिति पैदा हो। जो भी कदम उठाना होगा, उठाया जाएगा। मुख्यमंत्री भी अधिकारियों से बात करेें। मंत्री भी बातचीत करेंगे।
सिसोदिया ने कहा कि जिस तरह से उपराज्यपाल पूरे मामले को दिल्ली के गवर्नेंस से जोड़कर देख रहे हैं, उसके लिए हम उनके आभारी हैं। हालांकि, सिसोदिया ने मुख्यमंत्री के माफी मांगने की अधिकारियों की मांग का सीधा जवाब नहीं दिया।
उन्होंने इतना भर कहा कि जो घटना है उसकी गलत तरीके से व्याख्या हो रही है। फिर, इसकी पुलिस जांच कर रही है और मामला अदालत में भी है। लिहाजा इस बार पर बात करना ठीक नहीं होगा।