दिल्ली सरकार ने राजधानी में एक जुलाई 2019 तक की बनी सभी कच्ची कालोनियों को पक्की करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है। इसके साथ ही पहले चरण में दिल्ली की 1797 कालोनियों को पक्की करने का रास्ता खुलता दिख रहा है।
केंद्र और दिल्ली सरकार, दोनों के इस प्रस्ताव पर सहमत होने से राजधानी के 60 लाख लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। इससे दिल्ली की अवैध कालोनियों के विकास का रास्ता खुलेगा और प्रॉपर्टी बाजार भी उठेगा।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि अवैध कालोनियों को नियमित करने के लिए केंद्र ने कुछ सवाल उनसे पूछे थे। उनके जवाब के साथ सरकार ने कुछ सुझाव भी भेजे हैं।
इनमें आज तक की बनी सभी कालोनियों को नियमित करने का प्रस्ताव सबसे अहम है। इसके अलावा केंद्र से यमुना खादर, पुरातात्विक विभाग जैसे विभागों की जमीनों पर बनी कालोनियों को छोड़कर सबको निश्चित समय में नियमित करने का प्रस्ताव किया गया है।
डिमार्केशन का मु्द्दा भी सुलझाने का रास्ता बना
कालोनियों को नियमित करने के पीछे उनके डिमार्केशन को सबसे बड़ी बाधा बताया जा रहा था। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक दिल्ली सरकार ने एक पत्र लिखकर स्वयं इस बात को माना था कि डिमार्केशन के बिना कालोनियों का नियमितीकरण संभव नहीं है और इसमें न्यूनतम दो वर्ष का समय लगेगा।
लेकिन अब दिल्ली सरकार ने केंद्र को भेजे अपने सुझाव में कहा है कि जीपीएस और सेटेलाइट इमेजिंग से प्राप्त नक्शों को ही मार्किंग का प्रथम आधार माना जा सकता है।
पेनाल्टी देकर पक्की रजिस्ट्री
दिल्ली सरकार ने केंद्र को सुझाव दिया है कि जिन जमीनों पर बने मकानों को पक्का किया जाना है उसके लिए कुछ पेनाल्टी देकर उन्हें नियमित किया जा सकेगा। पेनाल्टी तय करने के समय अवैध कालोनी को आसपास बनी पक्की कालोनियों में सबसे कम कीमत की श्रेणी से भी एक श्रेणी कम मानकर तय किया जाएगा। पेनाल्टी और जमीनों के मूल्य के रुप में भुगतान के लिए बैंक से कर्ज दिलाए जाने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने 11 अक्टूबर 2011 के बाद जीपीए को अवैध घोषित कर दिया था। लेकिन दिल्ली सरकार ने केंद्र को सुझाव दिया है कि अब तक की सभी जीपीए को वैध मान्यता प्रदान कर दी जाए।
आगे न बसे अवैध कालोनी
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली को साफ सुथरा रखने के लिए जरुरी है कि अब यहां कोई अवैध कालोनी न बसे। उन्होंने केंद्र को सुझाव दिया है कि एक बार सभी कालोनियों को नियमित कर इसके बाद बसने वाली कालोनी के लिए तत्कालीन एसएचओ और स्थानीय एसडीएम को बर्खास्त किया जाए। उन्होंने कहा कि बिना जिम्मेदारी तय किए अवैध कालोनियों को बसने से नहीं रोका जा सकता।