हाईकोर्ट ने वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व अन्य के खिलाफ दायर मानहानि मामले में जेटली द्वारा पेश अतिरिक्त साक्ष्यों को रद्द करने से इंकार कर दिया।
हालांकि अदालत ने केजरीवाल व अन्य को आंशिक राहत प्रदान करते हुए उन्हें इस साक्ष्यों पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय प्रदान कर दिया।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी के समक्ष जेटली द्वारा दायर मानहानि की मुख्य याचिका के बाद पेश अतिरिक्त साक्ष्यों को स्वीकार करने के मुद्दे पर जिरह हुई।
अदालत ने दोनों पक्षों को विस्तृत जिरह सुनने के बाद कहा कि वे इस मामले में प्रतिवादी बनाए गए केजरीवाल व अन्य को अपना पक्ष रखने का मौका प्रदान करते है।
उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि उन्हें पक्ष रखने का मौका मिलना जरूरी है। सभी तीन सप्ताह में पेश अतिरिक्त साक्षों पर अपना जवाब दाखिल करें।
अदालत ने अब इस मामले में अगली सुनवाई 12 जुलाई तय की है। इसेस पूर्व जेटली की और से पेश अधिवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत अन्य आप नेता सिविल मानहानि मामले की सुनवाई में देरी करने के हर संभव कदम उठा रहे हैं।
उन्होंने संयुक्त रजिस्ट्रार ने इन सभी को कई बार पक्ष रखने का मौका प्रदान किया है। बावजूद इसके इन्होंने जबाव दाखिल नहीं किया और वे लगातार फर्जी आरोप लगा रहे है लेकिन अपने आरोपों के समर्थन में एक भी सबूत पेश नहीं किया।
उन्होंने कहा हमने जो भी अतिरिक्त साक्ष्य व दस्तावेज पेश किए है वे मुख्य याचिका के ही समर्थन में दायर किए है ऐसे में उन्हें स्वीकार किया जाना जरूरी है।
वहीं केजरीवाल व अन्य आप नेताओं की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता ने कहा कि जो नए साक्ष्य व आरोप लगाए गए है वे मुख्य याचिका में नहीं है और उन्हें इस प्रकार से मुख्य याचिका के साथ पेश नहीं किया जा सकता। हमने याचिका पर जबाव दे दिया है और उसके बाद नए सिरे से आरोप व साक्ष्य नहीं दिए जा सकते।
इससे पूर्व मुख्यमंत्री समेत अन्य पांच आप नेताओं ने साक्ष्यों में पेश दस्तावेजों की फोटोकॉपी की स्वीकार्यता पर आपत्ति जाहिर की थी। उन्होंने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत केंद्रीय मंत्री ने अपने सुबूतों के समर्थन में न तो धारा 65बी के तहत प्रमाण पत्र दिया और न ही कोई हलफनामा दायर किया है।
गौरतलब है कि अरुण जेटली ने डीडीसीए में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में उन्हें और उनके परिवार के खिलाफ बयानबाजी करने पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, आप नेता राघव चड्ढा, कुमार विश्वास, आशुतोष, संजय सिंह और दीपक वाजपेयी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। अपनी याचिका में उन्होंने इन सभी से 10 करोड़ बतौर मुआवजा दिलवाने की मांग की है।