दिल्ली में आबकारी नीति को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच शनिवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भापजा को घेरा। उन्होंने दावा किया कि अगर भाजपा ने देश में अन्य दलों की सरकारों को गिराने पर 6,300 करोड़ रुपये खर्च नहीं किए होते तो केंद्र को खाद्य पदार्थों पर जीएसटी नहीं लगाना पड़ता। केजरीवाल ने ट्वीट करते हुए कहा कि दही, छाछ, शहद, गेहूं, चावल आदि पर अभी जो जीएसटी लगाया गया, उस से केंद्र सरकार को सालाना 7,500 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। सरकारें गिराने पर अभी तक इन्होंने 6,300 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। अगर ये सरकारें ना गिराते तो गेहूं, चावल, छाछ आदि पर जीएसटी ना लगाना पड़ता। लोगों को महंगाई का सामना ना करना पड़ता।
गुजरात चुनाव नहीं लड़े तो सभी जांच बंद हो जाएगी
इससे पहले केजरीवाल ने आरोप लगाया कि दिल्ली की आप सरकार को गिराने के लिए सभी राष्ट्र विरोधी ताकतें इकट्ठी हो गईं हैं। इन राष्ट्र विरोधी ताकतों से भारत की तरक्की देखी नहीं जा रही है। षड्यंत्र के तहत मनीष सिसोदिया पर झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई और आरोप लगाया कि इन्होंने शराब में पैसे खाए। लोग बता रहे हैं कि गुजरात चुनाव की वजह से यह सब हो रहा है, अगर हम घोषणा कर दें कि गुजरात में चुनाव नहीं लड़ेंगे, तो ये सारी जांच बंद हो जाएगी।
सरकारें गिराने व दोस्तों का कर्ज माफ करने में खर्च हो रहा पैसा
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज देश का हर आदमी महंगाई से परेशान है। हर एक चीज का दाम दोगुना-तीन गुना हो गया है। एक आम आदमी की तनख्वाह बढ़ी नहीं है। लोगों ने इतना जीएटी लगा दिया है। यह सारा पैसा अपने अरबपति दोस्तों के कर्जे माफ करने और विधायकों को खरीदने पर खर्च हो रहा है। महाराष्ट्र की सरकार गिराने के दौरान दही, छाछ, शहद, गेहूं, चावल पर जीएसटी लगा दी। अगर अपने दोस्तों का कर्जा माफ करना होता है तो पेट्रोल आदि के दाम बढ़ा देते है।