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युवा तुर्कों पर टिकी अरविंद केजरीवाल की उम्मीद, नई पीढ़ी की नब्ज पकड़ने में कामयाब हो रही ये रणनीति

Mon, 21 Dec 2020 02:46 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

राघव चड्ढा को पंजाब का सह-प्रभारी बनाने से राज्य में मजबूत होगी पार्टी, युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय होने से बदलेंगे समीकरण...
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राघव चड्ढा - फोटो : एएनआई
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आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को पंजाब का सह-प्रभारी नियुक्त किया है। वे मुख्य प्रभारी जरनैल सिंह के साथ मिलकर पार्टी को पंजाब में मजबूत बनाएंगे। कैप्टन अमरिंदर सिंह और बादल परिवार के धुरंधरों के सामने अगले विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी को मजबूत बनाना 32 वर्षीय युवा राघव चड्ढा के लिए कठिन चुनौती है।

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अरविंद केजरीवाल की राजनीति को देखें तो वे इस तरह के दांव लगातार खेल रहे हैं। वे बड़ी पार्टियों के बड़े-बड़े दिग्गजों के सामने लगातार नए-नए युवाओं को अवसर दे रहे हैं। यह प्रयोग पार्टी के लिए अच्छा परिणाम भी दे रहा है, इसलिए वे निरंतर इस फॉर्मूले को आजमा रहे हैं।

इसके पहले अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली नगर निगम चुनाव की जिम्मेदारी युवा दुर्गेश पाठक के कंधों पर डाली है। वे पूरी तैयारी के साथ रोज भाजपा पर हमले कर रहे हैं और उसके लिए रोज नई मुसीबत खड़ी कर रहे हैं। भारी-भरकम नामों और बड़े चेहरों वाली भाजपा की दिल्ली प्रदेश इकाई केवल उनके सवालों के जवाब देने तक में सिमट कर रह जा रही है।
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इसके पहले आप ने दिल्ली डायलाग कमीशन की जिम्मेदारी जैस्मिन शाह, शिक्षा पर महत्वपूर्ण बदलावों के सुझाव के लिए बनी कमेटी की जिम्मेदारी आतिशी मार्लेना जैसे युवाओं के हाथों में दे रखी है। सौरभ भारद्वाज पार्टी के लिए सबसे प्रखर वक्ता साबित हुए हैं, तो इससे पहले दिलीप पांडेय इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा चुके हैं। ये सभी प्रयोग पार्टी के लिए काफी सफल रहे हैं।

राघव ने युवाओं को बताया अपनी प्राथमिकता

वर्ष 2011 से ही अरविंद केजरीवाल के साथ जुड़ चुके राजेंद्र नगर के विधायक राघव चड्ढा ने अपना पद संभालते ही अपने तेवर दिखा दिए हैं। उन्होंने कहा है कि वीरों की धरती पंजाब के बड़ी संख्या में युवा आज नशे की गिरफ्त में हैं। उन्हें नशे से तोड़कर समाज निर्माण की ओर मोड़ना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। हंसमुख, पढ़े-लिखे राघव चड्ढा खुद पंजाबी समुदाय से आते हैं। वे पंजाब के युवाओं के बीच ज्यादा स्वीकार्य हो सकते हैं जो राज्य में पार्टी की आकांक्षाओं को जमीन पर उतारने में मजबूत आधार दे सकता है।

क्या कहते हैं पार्टी नेता

आम आदमी पार्टी के नेता सांसद संजय सिंह कहते हैं कि उनकी पार्टी के लिए यह कोई नया प्रयोग नहीं है। पार्टी बनाने से पहले चला आंदोलन भी पूरी तरह युवाओं के कारण ही संभव हो पाया था। नए युवाओं की ऊर्जा और परंपरागत सोच से आगे बढ़कर नई सोच के साथ कार्य करना इन युवाओं की सबसे बड़ी खूबसूरती है। यही कारण है कि पार्टी लगातार युवाओं को बड़ी जिम्मेदारी दे रही है।

पार्टी के एक नेता कहते हैं कि युवाओं को आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा फायदा यही होता है कि वे युवाओं के साथ तेजी से जुड़ते हैं। युवा भी उनसे लगाव महसूस करते हैं। ये युवा सोशल मीडिया को ज्यादा बेहतर ढंग से समझते हैं और इसका पार्टी की सोच के प्रचार-प्रसार में बेहतर तरीके से इस्तेमाल करते हैं। इससे सामाजिक और राजनीतिक बदलाव की बड़ी उम्मीद बंधती है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बड़े नाम किसी भी पार्टी के लिए एक संपत्ति की तरह होते हैं। उनका अनुभव किसी भी पार्टी को मजबूत बनाने में काम आता है। लेकिन कई मामलों में ये बड़े नाम महत्वकांक्षाओं के शिकार हो जाते हैं और इसकी कीमत पार्टी को चुकानी पड़ती है। पंजाब में पार्टी इसका बड़ा खामियाजा पिछले चुनाव में भुगत चुकी है।

जबकि युवा नेता इस तरह की महत्वाकांक्षा, गुटबाजी से दूर रहते हैं और पूरी ऊर्जा के साथ पार्टी को मजबूत करने में लगे रहते हैं। यही कारण है कि अरविंद केजरीवाल इन युवा तुर्कों के सहारे ही राजनीति को एक नई परिभाषा देने में जुटे हुए हैं।

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