आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को पंजाब का सह-प्रभारी नियुक्त किया है। वे मुख्य प्रभारी जरनैल सिंह के साथ मिलकर पार्टी को पंजाब में मजबूत बनाएंगे। कैप्टन अमरिंदर सिंह और बादल परिवार के धुरंधरों के सामने अगले विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी को मजबूत बनाना 32 वर्षीय युवा राघव चड्ढा के लिए कठिन चुनौती है।
वर्ष 2011 से ही अरविंद केजरीवाल के साथ जुड़ चुके राजेंद्र नगर के विधायक राघव चड्ढा ने अपना पद संभालते ही अपने तेवर दिखा दिए हैं। उन्होंने कहा है कि वीरों की धरती पंजाब के बड़ी संख्या में युवा आज नशे की गिरफ्त में हैं। उन्हें नशे से तोड़कर समाज निर्माण की ओर मोड़ना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। हंसमुख, पढ़े-लिखे राघव चड्ढा खुद पंजाबी समुदाय से आते हैं। वे पंजाब के युवाओं के बीच ज्यादा स्वीकार्य हो सकते हैं जो राज्य में पार्टी की आकांक्षाओं को जमीन पर उतारने में मजबूत आधार दे सकता है।
आम आदमी पार्टी के नेता सांसद संजय सिंह कहते हैं कि उनकी पार्टी के लिए यह कोई नया प्रयोग नहीं है। पार्टी बनाने से पहले चला आंदोलन भी पूरी तरह युवाओं के कारण ही संभव हो पाया था। नए युवाओं की ऊर्जा और परंपरागत सोच से आगे बढ़कर नई सोच के साथ कार्य करना इन युवाओं की सबसे बड़ी खूबसूरती है। यही कारण है कि पार्टी लगातार युवाओं को बड़ी जिम्मेदारी दे रही है।
पार्टी के एक नेता कहते हैं कि युवाओं को आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा फायदा यही होता है कि वे युवाओं के साथ तेजी से जुड़ते हैं। युवा भी उनसे लगाव महसूस करते हैं। ये युवा सोशल मीडिया को ज्यादा बेहतर ढंग से समझते हैं और इसका पार्टी की सोच के प्रचार-प्रसार में बेहतर तरीके से इस्तेमाल करते हैं। इससे सामाजिक और राजनीतिक बदलाव की बड़ी उम्मीद बंधती है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, बड़े नाम किसी भी पार्टी के लिए एक संपत्ति की तरह होते हैं। उनका अनुभव किसी भी पार्टी को मजबूत बनाने में काम आता है। लेकिन कई मामलों में ये बड़े नाम महत्वकांक्षाओं के शिकार हो जाते हैं और इसकी कीमत पार्टी को चुकानी पड़ती है। पंजाब में पार्टी इसका बड़ा खामियाजा पिछले चुनाव में भुगत चुकी है।
जबकि युवा नेता इस तरह की महत्वाकांक्षा, गुटबाजी से दूर रहते हैं और पूरी ऊर्जा के साथ पार्टी को मजबूत करने में लगे रहते हैं। यही कारण है कि अरविंद केजरीवाल इन युवा तुर्कों के सहारे ही राजनीति को एक नई परिभाषा देने में जुटे हुए हैं।