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Arvind Kejriwal Arrest: अरविंद केजरीवाल पहले ऐसे मुख्यमंत्री, जिन्हें पद पर रहते हुए ईडी ने किया गिरफ्तार

Fri, 22 Mar 2024 11:48 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है। गुरुवार को दो घंटे पूछताछ के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें गिरफ्तार किया है। केजरीवाल को दिल्ली के कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में अरेस्ट किया गया है।
 
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Arvind Kejriwal Arrest - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कथित शराब नीति घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार रात दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया। केजरीवाल पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्हें पद पर रहते हुए किसी एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किया गया है। केजरीवा से पहले कई मुख्यमंत्री अरेस्ट हुए, लेकिन जेल जाने से पहले उन्होंने अपनी कुर्सी किसी दूसरे नेता को सौंप दी थी। 
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आपको बता दें कि इसी वर्ष 31 जनवरी को कथित भूमि घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी द्वारा गिरफ्तार किए जाने से पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने झारखंड के सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। तब से सोरेन जेल में हैं। सोरेन की गिरफ्तारी के बाद झामुमो ने मुख्यमंत्री पद की कमान पार्टी के दिग्गज नेता चंपई सोरेन को सौंप दी गई थी।

जेल जाने से पहले जयललिता ने दिया था इस्तीफा
इनके अलावा, तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता को भी सीएम का पद छोड़ना पड़ा था। साल 2014 में आय से अधिक संपत्ति के मामले में जयललिता दोषी पाई गईं थीं। अदालत के निर्णय के तुरंत बाद जयललिता ने अपना उत्तराधिकारी ओ पन्नीरसेल्वम को नियुक्त कर दिया था। 20 दिन तक जेल में रहने के बाद जयललिता बाहर आ गईं, हालांकि मुख्यमंत्री की कुर्सी उन्हें 237 दिन मिली थी। 
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चारा घोटाले में शिकंजा कसा तो लालू ने छोड़ी कुर्सी
साल 1997 को बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद पर सीबीआई ने चारा घोटाले में शिकंजा कसा। लालू की गिरफ्तारी वारंट जारी होते ही उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद दिल्ली के एक बड़े नेता की सलाह पर लालू ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया। राबड़ी को सीएम बनाने पर जनता दल में फूट पड़ गई। इस पर लालू यादव ने अपनी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल बनाई थी। 

येदियुरप्पा को छोड़ना पड़ी थी सीएम की कुर्सी

वर्ष 2011 में लोकायुक्त की एक रिपोर्ट के बाद कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री येदियुरप्पा को पद से इस्तीफा देना पड़ गया था। कर्नाटक के लोकायुक्त ने एक रिपोर्ट जारी की थी। इसमें कहा गया था कि सूबे का सीएम ऑफिस अवैध उत्खनन कार्य में सक्रिय है। इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई तो भाजपा बैकफुट पर आ गई। भाजपा आलाकमान ने येदियुरप्पा को हटाने का फैसला किया। इस फैसले से येदियुरप्पा पार्टी से नाराज हो गए। उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद डीवी सदानंद गौड़ा को कर्नाटक का नया मुख्यमंत्री बनाया गया था।

आप के सर्वे के अनुसार जेल से ही केजरीवाल चलाएंगे सरकार

दिल्ली की सियासत में बड़ा उफान गुरुवार को देखने को मिला। शाम ढलते ही मुख्यमंत्री निवास पर प्रवर्तन निदेशालय की टीम पहुंची। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से शराब नीति मामले में पूछताछ की। रात होते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। केजरीवाल को दिल्ली के कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में अरेस्ट किया गया है।

इसके बाद दिल्ली सरकार के सामने नेतृत्व संकट का सवाल खड़ा हो गया। चर्चा आम हो गई कि मुख्यमंत्री जेल गए तो दिल्ली का मुख्यमंत्री कौन होगा। हालांकि, आप ने एक हस्ताक्षर कैंपेन चलाया था, जिसमें 90 प्रतिशत लोगों ने यह कहा था कि जेल से ही मुख्यमंत्री दिल्ली का शासन संभालेंगे।

इधर, आम आदमी पार्टी के बड़े नेता अपने मुखिया की गिरफ्तारी के बाद मुखर रहे और यहां तक कहा कि जेल से ही मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली का शासन चलाएंगे। हालांकि, आप के कई विधायक ऊहापोह की स्थिति में रहे कि उन्हें मुख्यमंत्री निवास तक जाना है या नहीं। उन्हें अपने घरों में नजरबंद होने का भी संशय रहा। 

आम आदमी पार्टी में यह भी चर्चा आम रही कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। सूत्रों की माने तो मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन, संजय सिंह के जेल में होने से मंत्री आतिशी और सौरभ भारद्वाज ही कद्दावर नेता बनकर उभरे हैं। यह भी कयास लगाया जा रहा है कि केजरीवाल की पत्नी सुनीता केजरीवाल भी सत्ता संभाल सकती हैं।
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हालांकि, इस स्थिति में आम आदमी पार्टी के कई नेताओं में नाराजगी न हो और पार्टी एकजुट रहे इसे लेकर भी सहमति बनानी होगी। इस बीच कांग्रेस नेताओं को यह भी डर सता रहा है कि अगर भ्रष्टाचार के मामले ज्यादा तेजी से उठते है तो इसका खामियाजा उठाना पड़ेगा। कार्यकर्ता भी चुनाव में गर्मजोशी के साथ चुनावी समर में नहीं उतरेंगे।

गठबंधन से वैसे ही कांग्रेस का एक खेमा काफी नाराज है। दूसरी तरह कांग्रेस की नीति यह भी हो सकती है कि अपने छिटके हुए कैडर को इसी बहाने वापस कांग्रेस के पक्ष में लाया जाए।
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