एनआरएचएम घोटाले में फंसे और वर्तमान में जमानत पर चल रहे देवरिया के पूर्व विधायक आरपी जायसवाल को समय से कोर्ट में न पहुंचना भारी पड़ गया।
पौने 12 बजे तक जायसवाल कोर्ट नहीं पहुंचे तो सीबीआई विशेष न्यायाधीश एके झा ने उनके गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए।
बाद में विधायक अपने अधिवक्ता के साथ कोर्ट में पेश हुए और देरी से आने के लिए क्षमा मांगते हुए वारंट री-कॉल करने को अर्जी दी। इस पर न्यायाधीश ने 500 रुपये जुर्माना जमा करने पर वारंट री-कॉल कर दिया।
सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक बीके सिंह ने बताया कि देवरिया विधायक आरपी जायसवाल वर्तमान में जमानत पर चल रहे हैं।
बुधवार को एनआरएचएम घोटाले के एक मामले में उन्हें सीबीआई विशेष न्यायाधीश जी. श्रीदेवी की कोर्ट में पेश होना था, मगर न्यायाधीश के अवकाश पर होने के चलते इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश एके झा की कोर्ट में हुई।
निर्धारित समय पर अन्य सभी आरोपी कोर्ट में पेश हो गए, मगर पूर्व विधायक किसी कारणवश नहीं पहुंचे। इस पर विशेष न्यायाधीश ने उनके गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिए।
करीब 12 बजे आरपी जायसवाल अपने अधिवक्ता के साथ कोर्ट में पहुंचे और देरी से आने के लिए क्षमा प्रार्थना की। इसके साथ ही उनके अधिवक्ता ने वारंट री-कॉल करने को अर्जी दाखिल की।
इस पर विशेष न्यायाधीश ने 500 रुपये जुर्माना जमा किए जाने की शर्त पर वारंट री-कॉल करने का आदेश दिया। इस पर पूर्व विधायक ने 500 रुपये जुर्माना कोर्ट में जमा करा दिया।
लखनऊ के तीन कारोबारियों ने जमा किए डेढ़ करोड़
एनआरएचएम घोटाले में फंसे लखनऊ के तीन बडे़ ठेकेदारों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए 50-50 लाख रुपये के बैंक ड्राफ्ट कोर्ट में जमा कराए हैं। तीनों कारोबारियों में दो सगे भाई और एक उनका भतीजा है।
सीबीआई के विशेष अभियोजक वीके शर्मा के अनुसार विगत दिनों सुप्रीम कोर्ट ने एनआरएचएम घोटाले के आरोपियों को राहत देते हुए एक आदेश दिया था कि जिन लोगों पर घोटाले के जितने रुपये का आरोप है, उतना कोर्ट में जमा करके उन्हें जमानत दी जा सकती है।
इसी कड़ी में लखनऊ के कारोबारी अंशुल श्रीवास्तव ने बुधवार को 50 लाख रुपये के बैंक ड्राफ्ट कोर्ट में जमा करा दिए। विशेष लोक अभियेाजक ने बताया कि इससे कुछ दिन पूर्व ही दो अन्य कारोबारी जगमग श्रीवास्तव और अमिताभ श्रीवास्तव भी अपने-अपने हिस्से के 50-50 लाख के बैंक ड्राफ्ट कोर्ट में जमा करा चुके हैं।
लैकफेड घोटाले से संबंधित इस मामले की जांच सीबीआई इंस्पेक्टर मुकेश वर्मा ने की थी। आरोपियों ने प्रदेश भर के सरकारी अस्पतालों को अपग्रेड करने के लिए स्टूल, बेड, वेइंग मशीन जैसे करीब 18 आइटम सप्लाई किए थे। इनमें लाखों रुपये की बंदरबांट की गई थी।