वायु प्रदूषण के कारण विश्व में हर साल तीन लाख से अधिक मौतें होती हैं। इसका प्रमुख कारण पीएम 2.5 प्रदूषक तत्व है। राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक के अनुसार हवा में पीएम 2.5 का स्तर 60 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर से अधिक हो तो वह प्रदूषित मानी जाती है। राजधानी कॉलेज में पर्यावरण पर आधारित व्याख्यान में टेरी विश्वविद्यालय की पर्यावरणविद अंजू गोयल ने यह बात कही।
कॉलेज की पर्यावरण समिति की ओर से आयोजित व्याख्यान में गोयल ने कहा कि दिल्ली के 70-80 फीसदी क्षेत्र पीएम10 के बढते स्तर की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को निभाना चाहिए। जापान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर युताका मत्युमी नागोया ने कहा कि भारत में पीएम 2.5 का स्तर जापान से 17 गुणा अधिक है।
यह मनुष्यों के फेफड़ों को प्रभावित करता है। प्रो. युताका ने एक यन्त्र का निर्माण किया है, जिसे मोबाइल फोन से जोड़कर पीएम 2.5 के स्तर को नापा जा सकता हैं। वह राजधानी कॉलेज के फिजिक्स विभाग से काफी वर्षों से जुड़े हुए हैं। आने वाले समय में दिल्ली, पंजाब, हरियाणा एवं ग्रामीण क्षेत्रों में इस यंत्र को पहुंचाना चाहते