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80 हजार खरीदारों को जगी फ्लैट की आस

Tue, 17 Mar 2015 11:52 PM IST
अरविंद सिंह/ अमर उजाला, नोएडा
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नोएडा ओखला पक्षी विहार से दस किलोमीटर के दायरे में एनजीटी से लगी रोक के कारण खरीदारों को फ्लैट पर पजेशन पाने का इंतजार अब जल्द खत्म हो सकता है। रजिस्ट्री विभाग इन संपत्तियों का एग्रीमेंट टू सबलीज करवाकर खरीदारों को पजेशन का अधिकार देने पर विचार कर रहा है।
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ओखला पक्षी विहार केदस किलोमीटर के दायरे में बन रहे प्रोजेक्टों को कंपलीशन सर्टिफिकेट देने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने रोक लगा रखा है। करीब दो साल पहले ये रोक लगी थी। इसके चलते नोएडा प्राधिकरण कंपलीशन सर्टिफिकेट नहीं दे रहा, जिससे संपत्ति के खरीदारों के नाम न तो सबलीज हो रही है और न ही उनको पजेशन मिल रहा है। रजिस्ट्री विभाग का अनुमान है कि करीब 80 हजार फ्लैट बनकर तैयार हैं। अगर इन पर पजेशन मिल जाए तो खरीदारों को बड़ी राहत मिल जाएगी। इन संपत्तियों की रजिस्ट्री से करीब 200 करोड़ रुपये का स्टांप शुल्क मिलने का भी अनुमान है।

विभाग की तरफ से एक प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा गया है, जिसमें कहा गया है कि बिल्डर और खरीदार के बीच एग्रीमेंट टू सबलीज रजिस्टर्ड करवा ली जाए। मौजूदा सर्किल रेट के हिसाब से स्टांप शुल्क देकर खरीदार के पक्ष में एग्रीमेंट हो जाएगा। इससे जहां खरीदार संपत्ति का इस्तेमाल कर सकेंगे वहीं, दूसरी ओर विभाग को राजस्व मिल जाएगा। इससे एनजीटी के आदेश की भी अवहेलना नहीं होगी। एनजीटी से जब भी मामला साफ होगा, तब फाइनल डीड रजिस्टर्ड हो जाएगी। उस समय सिर्फ 50 रुपये केस्टांप पेपर पर रजिस्ट्री हो सकेगी।
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2001 से पहले था प्रावधान
30 अप्रैल 2001 से पहले यह प्रावधान था कि कोई भी संपत्ति का खरीदार सर्किल रेट के हिसाब से पूरा स्टांप चुकाकर एग्रीमेंट टू सबलीज करा सकता था। फाइनल रजिस्ट्री के समय मात्र 50 रुपये के स्टांप पेपर पर काम हो जाता था, मगर इसकेबाद नियम में संशोधन कर दिया गया, जिससे यह लाभ मिलना बंद हो गया।

मंत्रालय के पास अटका है मामला
दस किलोमीटर के दायरे को घटाकर 100 मीटर करने का प्रस्ताव बनाकर प्रदेश सरकार ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेज रखा है। यह प्रस्ताव मंत्रालय से पास होकर ट्रिब्युनल के पास भेजा जाना है। इसके बाद ट्रिब्युनल इस पर निर्णय करेगा। विगत करीब आठ माह से यह प्रस्ताव शासन के पास ही अटका हुआ है।

10 किलोमीटर में सिमट गया पूरा नोएडा
ओखला पक्षी विहार से 10 किलोमीटर के दायरे में लगभग पूरा नोएडा ही आ गया है। सेक्टर-71 व इसके आसपास के इलाके इसकी जद में हैं। इसी तरह एक्सप्रेसवे की तरफ जाने पर सेक्टर-134-135 तक का एरिया इस दायरे में आ रहा है। इस पूरे क्षेत्र में तमाम बड़े बिल्डरों के आवासीय, व्यावसायिक  और संस्थागत प्रोजेक्ट हैं, जो कि कंपलीशन की स्थिति में आ चुके हैं।

खरीदारों की जरूरत और सरकार के राजस्व को ध्यान में रखते हुए शासन एग्रीमेंट टू सबलीज पर विचार कर रहा है। अगर शासन से इस पर सहमति मिल गई तो संपत्तियों के खरीदारों को बड़ी राहत मिल जाएगी और सरकार को राजस्व मिल सकेगा।
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- अरविंद सिंह चंदेल, डीआईजी स्टांप, गौतमबुद्ध नगर
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