राजधानी में अवैध हथियार तस्कर बड़े पैमाने पर पुलिस को चकमा दे रहे हैं। यही वजह है कि हथियारों की बरामदगी और दर्ज मामलों में खासा अंतर है। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों पर गौर करें तो शुरुआती छह माह में हथियार बरामदगी में 11.6 फीसदी की वृद्धि हुई। इसके विपरीत हथियार तस्करी के दर्ज मामलों में खासी कमी देखी गई। जानकारों का कहना है कि तस्करों ने नए-नए तरीकों से हथियार दिल्ली-एनसीआर में लाना शुरू कर दिया है। ऐसे में तस्करी के समय बदमाशों का पकड़ा जाना कम ही संभव हो पा रहा है।
दूसरे राज्यों से सक्रिय तस्कर काफी अरसे से राजधानी के बदमाशों के लिए हथियारों की सप्लाई करते रहे हैं। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा और स्पेशल सेल की टीम के साथ-साथ जिले का स्पेशल स्टाफ भी लगातार इन तस्करों पर निगरानी रखता है। बीच-बीच में तस्करों की गिरफ्तारी कर उनसे हथियार बरामद किए जाते रहे हैं। पिछले छह माह के मौजूद आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में इस बार राजधानी में हथियारों की मांग बढ़ गई है। पुलिस इस साल तस्करों से पिछली बार से ज्यादा हथियार बरामद कर चुकी है। इस साल पुलिस ने 873 हथियार बरामद किए हैं, पिछले साल छह माह में 782 हथियार जब्त किए गए थे।
पुलिस अधिकारी ने कहा कि आंकड़े बताते हैं कि इस साल तस्करों की गिरफ्तारी में कमी आई है, लेकिन गिरफ्तार तस्करों से हथियारों की खेप ज्यादा बरामद की गई है। गिरफ्तारी कम होने से इस साल हथियार तस्करों के खिलाफ दर्ज मामलों में भी कमी आई है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि दिल्ली में हुईं कई वारदात में इस्तेमाल हथियारों की जांच में पता चला है कि गैंगस्टर विदेशी हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि वह अपने गैंग के बदमाशों के लिए देश में निर्मित अत्याधुनिक हथियार खरीद रहे हैं।
दिल्ली पुलिस ने पंजाब के कुछ तस्करों को भी गिरफ्तार किया है, जो विदेश से लाए गए हथियारों को बेचने के लिए दिल्ली आए थे। पुलिस अधिकारी का कहना है कि कोविड की वजह से भी दो साल तक हथियारों की तस्करी में कमी आई थी, लेकिन अब फिर से तस्कर राजधानी में हथियारों की तस्करी करने लगे हैं। पुलिस का दावा है कि अवैध हथियारों की आपूर्ति के खिलाफ कार्रवाई की वजह से बरामदगी में भी वृद्धि हुई है।
बचने के लिए कर रहे सोशल मीडिया एप का इस्तेमाल
अपराध शाखा के एक अधिकारी ने बताया कि हथियार तस्कर पहले मोबाइल के जरिये गैंग से संपर्क करते थे, जिसके जरिये उन्हें ट्रैक कर जल्द गिरफ्तार कर लिया जाता था, लेकिन तस्कर अब पुलिस से बचने के लिए सोशल मीडिया एप का इस्तेमाल कर रहे हैं। तस्कर इंटरनेट कॉल से ग्राहकों और डीलरों से संपर्क करते हैं। कई मामलों की जांच में पता चला है कि तस्कर हथियार इकट्ठा करने जाते समय भी अपने साथ फोन नहीं रखते हैं। वह सड़क के रास्ते हथियार लेने के लिए जाते हैं और जल्द से जल्द हथियार लेकर वहां से निकल जाते हैं।
मध्यप्रदेश बना हब
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के साथ-साथ अपराध शाखा व जिले की अन्य एजेंसियां कई हथियार तस्करों को गिरफ्तार कर चुकी हैं। तस्करों से पूछताछ में यह बात सामने आई है कि मध्यप्रदेश के कई इलाके अब अवैध हथियार बनाने के हब बन चुके हैं। पुलिस अधिकारी बताते हैं कि हथियार तस्कर पहले बिहार के मुगेर और यूपी के मेरठ में निर्मित हथियारों को दिल्ली-एनसीआर में सप्लाई करते थे, लेकिन अब तस्कर मध्य प्रदेश के खारगोन, धार, सेंधवा और बुरहानपुर से हथियार लाकर उन्हें दिल्ली में बेच रहे हैं। दिल्ली पुलिस के अधिकारी का कहना है कि खारगोन और धार में जहां देशी पिस्टल बनाई जाती हैं, वहीं सेंधवा और बुरहानपुर में अत्याधुनिक पिस्टल बनती हैं। हथियार लेने के बाद तस्कर बस से यात्रा करते हैं। पूरे रास्ते वाहन बदलते रहते हैं।
हथियार तस्करों के खिलाफ कार्रवाई
वर्ष गिरफ्तार
2022 2519
2023 2118
तस्करों के खिलाफ मामला दर्ज
वर्ष केस
2022 2227
2023 1853
हथियार बरामद
वर्ष हथियार
2022 782
2023 873