अरावली के जंगलों में कितने जंगली जानवर है। उनकी कौन-कौन सी प्रजातियां मौजूद हैं। वह किन-किन क्षेत्रों में मौजूद हैं। इसकी
तस्वीर अगले पांच माह में साफ हो जाएगी। हरियाणा वन्य जीव विभाग और देहरादून स्थित वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) की ओर से किए जा रहे सर्वे को तेज करने का निर्देश दिया गया है।
जून तक डब्ल्यूआईआई अपनी रिपोर्ट सौंप देगा। इसके आधार पर प्रदेश सरकार वन्य जीवों के संरक्षण का विशेष प्लान तैयार करेगी। दरअसल, अरावली के वन्य जीवों के अस्तित्व को लेकर कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
यहां तेंदुआ, नील गाय, हिरण, लकड़बग्घा, लोमड़ी समेत कई अन्य वन्य जीव मौजूद हैं, लेकिन ये कहां मौजूद है। इनकी संख्या कितनी है। इस बारे में अभी सटीक जानकारी नहीं है।
इन वन्य जीवों के संरक्षण के लिए वन्य विभाग भी चिंतित है। इस बाबत हरियाणा सरकार ने 10 जनवरी को डब्ल्यूआईआई को सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी थी।
बता दें कि पहली बार प्रदेश सरकार हरियाणा के हिस्से की अरावली के जंगलों में पाए जाने वाले जंगली जानवरों की गणना करा रही है। भिवानी, मेवात, गुड़गांव, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, फरीदाबाद और पलवल के क्षेत्रों में घने जंगल है, जहां जंगली जानवरों की रिहायश है।
यहां पर डब्ल्यूआईआई के जीव वैज्ञानिक जानवरों के पैरों के निशान और गोबर की जांच के आधार पर जंगली जानवरों की तलाश की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक दमदमा झील, सुल्तानपुर पक्षी उद्यान और मेवात के कुछ हिस्सों में 30 किलोमीटर के आसपास कुछ जानवरों के पांव के निशान मिले हैं।
बताया गया है कि दमदमा झील के पास 2.5 किलोमीटर क्षेत्र में तेंदुआ के पांव के निशान और लोमड़ी और अन्य दुर्लभ वन्य जीवों के भी पांव के निशान मिले हैं।
भिवानी से लेकर पलवल तक हो रहा है अरावली में सर्वे तीन साल पहले वन्य जीवों की गणना की गई थी। उस समय किया गया सर्वे सफल रहा था, लेकिन अब नए सिरे से सर्वे किया जा रहा है। अब
डब्ल्यूआईआई वैज्ञानिक तरीके से जंगली जानवरों की गणना कर रही है। जून तक इसके पूरा होने की संभावना है।-राज कुमार भाटिया, जिला वन्य जीव अधिकारी