अरावली वन भूमि के संरक्षण को लेकर सवालों के घेरे में खड़ी हरियाणा सरकार की एक और परियोजना को झटका लगा है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की वन मंजूरी समिति (एफएसी) ने गुरुग्राम के मानेसर में एक सरकारी डिग्री कॉलेज बनाने के लिए वन भूमि के डायवर्जन संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी देने से मना कर दिया है।
एफएसी ने कहा कि राज्य के पास बहुत कम वन भूमि है। ऐसे में किसी परियोजना के लिए उसके डायवर्जन के बजाए उसका संरक्षण किया जाना चाहिए।
गुरुग्राम के जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी की ओर से मानेसर में एक सरकारी डिग्री कॉलेज बनाने के लिए अरावली वन क्षेत्र में 1.9835 हेक्टेयर वन भूमि को डायवर्ट करने के लिए आवेदन किया गया था।
प्रस्ताव पहले चंडीगढ़ स्थित पर्यावरण मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय में भेजा गया था, बाद में मंत्रालय में विचार के लिए यह प्रस्ताव आया। इसके बाद इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय के लिए एफएसी के समक्ष पेश किया गया।
एफएसी ने पूरी परियोजना पर विचार करने के बाद कहा कि इसे मंजूरी नहीं दे सकते हैं। हरियाणा में न सिर्फ वन का दायरा बेहद कम है, बल्कि इस परियोजना के लिए वन भूमि के बाहर किसी अन्य वैकल्पिक साइट को चिन्हित करने के लिए कोई कवायद नहीं की गई।
अरावली वन भूमि संरक्षण के लिए हरियाणा सरकार को लगातार सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) से फटकार लग रही है। खासतौर से अरावली वन क्षेत्र में होने वाले प्रदूषण और सरकार के जरिए अरावली वन भूमि को संरक्षित करने वाले कानून में संशोधन बिल के लिए कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को शुक्रवार को यह चेताया भी है कि अरावली में किसी भी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए।