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मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हाई पावर्ड वर्क्स परचेज कमेटी की बैठक में 149 करोड़ रुपये की इस परियोजना को मिली हरी झंडी
- पेयजल व्यवस्था होगी मजबूत, बसई डब्ल्यूटीपी विस्तार परियोजना को हरी झंडी
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। शहर में पेयजल आपूर्ति को और बेहतर करने के लिए गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) बसई वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) का विस्तार करेगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हुई हाई पावर्ड वर्क्स परचेज कमेटी (एचपीडब्ल्यूपीसी) की बैठक में 149 करोड़ रुपये की इस परियोजना को मंजूरी दी गई। इसके तहत बसई संयंत्र में 100 एमएलडी की चौथी यूनिट का निर्माण होगा। इससे प्लांट की जल शोधन क्षमता 270 से बढ़कर 370 एमएलडी हो जाएगी।
जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीणा ने बताया कि परियोजना के तहत 100 एमएलडी क्षमता की फिल्ट्रेशन यूनिट-4 का निर्माण, 300-300 मिलियन लीटर क्षमता के दो सेडिमेंटेशन-कम-स्टोरेज टैंक, रॉ वाटर पाइपलाइन, आधुनिक ऑटोमेशन और मॉनिटरिंग सिस्टम सहित अन्य सिविल कार्य किए जाएंगे। इस परियोजना को पूरा होने में 30 महीने का समय लगेगा। उन्होंने बताया कि नई यूनिट शुरू होने के बाद बसई डब्ल्यूटीपी की क्षमता 370 एमएलडी हो जाएगी। इससे मौजूदा और नए विकसित हो रहे रिहायशी क्षेत्रों में पेयजल की बढ़ती मांग को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा। अतिरिक्त स्टोरेज क्षमता के कारण अधिक मांग और रखरखाव के दौरान भी जलापूर्ति प्रभावित नहीं होगी तथा दूर-दराज के इलाकों तक पानी की आपूर्ति में सुधार होगा।
वर्तमान में जीएमडीए बसई और चंदू बुढेरा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 670 एमएलडी पेयजल की आपूर्ति कर रहा है। बसई डब्ल्यूटीपी में फिलहाल तीन फिल्ट्रेशन यूनिट हैं, जिनकी कुल क्षमता 270 एमएलडी और भंडारण क्षमता 1,385 मिलियन लीटर है। नई यूनिट और दो अतिरिक्त स्टोरेज टैंक बनने के बाद बसई प्लांट की कुल भंडारण क्षमता बढ़कर लगभग 2,000 मिलियन लीटर हो जाएगी। पीसी मीणा ने कहा कि शहर के तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए जीएमडीए जल आपूर्ति ढांचे का लगातार विस्तार और आधुनिकीकरण कर रहा है।
ऑनलाइन होगी निगरानी
जीएमडीए इस संयंत्र में स्काडा प्रणाली लगवाने जा रहा है। इससे संयंत्र पर ऑनलाइन निगरानी रखी जा सकेगी। साॅफ्टवेयर से पानी शोधन और आपूर्ति पर नजर रखी जा सकेगी। नए संयंत्र मेंं आधुनिक मशीनरी और तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। वर्तमान में बसई संयंत्र में 90-90 एमएलडी की तीन यूनिट कार्यरत हैं। बसई संयंत्र तक यमुना नहर से करीब 69 किलोमीटर दूर से पानी गुरुग्राम कैनाल से लाया जाता है।