निर्भया के दोस्त पर नहीं होगी एफआईआर
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निर्भया मामले में दोषी पवन गुप्ता के पिता को सोमवार को सत्र न्यायालय से भी निराशा हाथ लगी। सत्र न्यायालय ने भी उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें निर्भया के मित्र व केस के एकमात्र गवाह पर एफआईआर दर्ज करने मांग की गई थी। निचली अदालत ने भी एफआईआर का निर्देश देने की मांग को खारिज कर दिया था। पवन के पिता हीरा लाल गुप्ता का आरोप है कि निर्भया के मित्र ने पैसे लेकर समाचार चैनलों को साक्षात्कार दिया जिससे इस मामले की सुनवाई प्रभावित हुई।
पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एके जैन अपील खारिज करते हुए कहा कि यह एक निराश पिता की अपने दोषी बेटे को बचाने की दुर्भावनापूर्ण कोशिश है। याचिकाकर्ता का बेटा फांसी से एक कदम दूर है, इसलिए उस पर बेबुनियाद याचिका दायर करने के लिए जुर्माना नहीं लगाया जा रहा है। अदालत ने यह भी कहा कि किसी संपादक के ट्वीट के आधार पर चश्मदीद गवाह को कटघरे में खड़ा नहीं किया जा सकता।
अभियोजन पक्ष ने अपील खारिज करने की मांग करते हुए कहा था कि पवन के पिता बेटे को फांसी से बचाने के लिए बेमतलब की अर्जी दायर कर रहेे हैं। वहीं पीड़िता की मां की वकील ने कहा कि पीड़िता की मां इंसाफ के लिए कई सालों से भटक रही है और उधर दोषी फांसी की तारीख टलवाने के लिए अर्जियां डाल रहे हैं।
सत्र न्यायालय ने माना कि गवाह के बयान और मृतका के मृत्यु पूर्व दिए बयान में कोई विरोधाभास नहीं है। यहां तक कि पुलिस व अन्य बयान में कोई विरोधाभास नहीं है। इसलिए बयान को झूठा नहीं कहा जा सकता। दूसरा साक्षात्कार के लिए पैसे लेना गवाह का निजी मामला है। इसे भ्रष्टाचार कहना उचित नहीं है। इसका कोई साक्ष्य भी नहीं हैं। इसलिए इस अपील को खारिज किया जाता है।