वैवाहिक अपराध से जुड़ा है मामला
नई दिल्ली(संवाद)। हाई कोर्ट ने वैवाहिक अपराध से जुड़े एक मामले में प्राथमिकी रद्द करने की याचिका खारिज करते हुए वकील और पक्षकार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। मामला क्रूरता और वैवाहिक अपराध से जुड़ी प्राथमिकी का है। न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने मामले में पारिवारिक अदालत को गुमराह करने पर हैरानी जताई। आरोपी और उसके वकील ने दावा किया था कि दोनों पक्षों ने पहले ही पारिवारिक अदालत में आपसी सहमति से तलाक ले लिया है। विवाद सुलझ गया है, इसलिए प्राथमिकी रद्द की जाए।
हालांकि, सुनवाई में अदालत ने पाया कि जरूरी तथ्य छिपाए गए थे। आरोपी ने दूसरी शादी के समय रजिस्ट्रार के सामने खुद को कुंवारा बताया, जबकि उसकी शादी हो चुकी थी। इससे उसकी दूसरी शादी अमान्य है। इसके बावजूद वकील और आरोपी ने झूठी दलीलों से पारिवारिक अदालत को गुमराह किया और अमान्य शादी के मामले में तलाक ले लिया।