अमेरिकी कैब कंपनी उबर ने दिल्ली महिला आयोग की जांच टीम के समक्ष अपनी गलती कबूली है कि उन्होंने भारत में टैक्सी सेवाएं देने से पहले भारतीय परिवहन नियमों का पालन नहीं किया, क्योंकि कंपनी अमेरिका की है और अधिकारियों को नियमों की जानकारी नहीं थी।
खास बात यह है कि हादसे पर उबर ने माफी और अफसोस जताते हुए कहा है कि वे दिल्ली महिला आयोग समेत परिवहन व पुलिस के दिशा-निर्देशों के तहत अपनी सेवाएं देना चाहते हैं, ताकि फिर से यात्रियों का भरोसा जीत सकें।
उबर कंपनी के अधिकारियों ने पूछताछ के दौरान भारतीय परिवहन नियमों का पालन न करने की गलती मानी है। उनका कहना है कि अमेरिकी कंपनी होने के चलते उन्हें भारतीय नियमों की जानकारी नहीं थी। हालांकि कंपनी अब नियमों के तहत दोबारा सेटअप लगाना चाहती है।
यदि कंपनियां भारतीय परिवहन नियमों व पुलिस के दिशा-निर्देशों के तहत काम करती हैं तो फिर उन्हें सड़कों पर उतरने दिया जाना चाहिए। क्योंकि बेटियां हादसों से डरकर घर में तो चुपचाप तो नहीं बैठ सकती हैं।
दिल्ली महिला आयोग ने भेजा था नोटिस
दिल्ली महिला आयोग ने अमेरिकी कंपनी उबर को टैक्सी में हुए रेप मामले पर मंगलवार को समन भेजते हुए आयोग के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था। दिल्ली महिला आयोग ने कंपनी के अधिकारियों को जांच के लिए बुलाया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे।
तीन बजे उन्हें आयोग के समक्ष पेश होना था। तय समय पर न पहुंचने के बाद आयोग ने इसकी जानकारी दिल्ली पुलिस को दी। उसके बाद दिल्ली पुलिस के दो अधिकारियों के घेरे में 4.20 जांच के लिए पहुंचे और पौने छह बजे चले गए।
महिला आयोग की अध्यक्ष बरखा शुक्ला सिंह समेत उनकी तीन सदस्यीय टीम ने बंद कमरे में लगभग एक घंटे तक उबर अधिकारियों से पूछताछ शुरू की। आयोग ने उनसे पूछा कि उन्होंने भारतीय परिवहन नियमों का पालन क्यों नहीं किया?
कंपनी ने पूछताछ के दौरान कबूला कि उनकी टैक्सी में जीपीएस नहीं था। क्योंकि उन्हें उसकी अनिवार्यता समेत ऐसे हादसे का अंदेशा नहीं था। आयोग ने ड्राइवर समेत टैक्सी को कैसे हायर किया इसकी भी पूरी डिटेल ली।
उबर के खिलाफ जालसाजी का मामला दर्ज
कैब में रेप के चार दिन बाद पुलिस ने कैब कंपनी उबर के खिलाफ सराय रोहिल्ला थाने में जालसाजी और वैध सरकारी आदेश की अवहेलना का मामला दर्ज किया, जबकि बुराड़ी थाने में आरोपी कैब ड्राइवर के खिलाफ भी फर्जीवाड़े की रिपोर्ट दर्ज की गई है। उधर, दिल्ली पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने कहा कि अमेरिकी कैब कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के लिए कानूनी सलाह ली जा रही है।
उत्तरी जिला के पुलिस उपायुक्त मधुर वर्मा ने बताया कि सोमवार को उबर के दिल्ली एनसीआर चीफ गगन भाटिया से पूछताछ में पता चला कि कंपनी के पास कोई कागजी दस्तावेज नहीं हैं।
कंपनी ड्राइवर रखने से पहले न ही वेरिफिकेशन करती है और न ही उन पर अंकुश रखने के लिए कोई नियम कानून है। यह नियम के उल्लंघन में भी लिप्त है। पुलिस ने कंपनी के अज्ञात लोगों पर दर्ज किया है क्योंकि अमेरिका से संचालित कंपनी में कसूरवार कौन है इस बारे में पता किया जाना बाकी है।