नए बिल्डिंग बायलॉज का फायदा लेना बिल्डरों के लिए आसान नहीं होगा। गोविंदपुरम की समस्या को देखते हुए जीडीए ने बहुमंजिला इमारत निर्माण के लिए नगर निगम की एनओसी भी अनिवार्य कर दी है।
निगम को हस्तांतरित कालोनियों में नक्शा पास कराने के लिए बिल्डरों को निगम से एनओसी लेनी होगी। निगम का जलकल विभाग एनओसी देने से पहले देखेगा कि मकानों के निर्माण के बाद बढ़ने वाली आबादी का दबाव सीवर और वाटर लाइनें झेल पाएंगी या नहीं।
दरअसल, महानगर में अधिकांश कालोनियां ऐसी हैं जिनमें पहले ही क्षमता से ज्यादा आबादी है। यहां डाली गई सीवर, पेयजल लाइनें पहले ही ओवरलोड हैं।
संसाधनों की कमी के चलते कालोनियों में सीवर जाम, ओवर फ्लो और जलभराव की समस्याएं बनी हुई हैं। नए बिल्डिंग बायलॉज को लागू करने से पहले मांगी गई आपत्तियों में सबसे ज्यादा आपत्तियां गोविंदपुरम से मिली थीं।
चार गुना आबादी बढ़ाने के प्रस्ताव को देख स्थानीय पार्षद और आरडब्ल्यूए ने इसका विरोध किया था। ऐसे में अब जीडीए ने नगर निगम की एनओसी को अनिवार्य कर दिया है। निगम की एनओसी बिना जीडीए नक्शा पास नहीं करेगा।
डेवलपमेंट शुल्क निगम को होगा ट्रांसफर
नए बिल्डिंग बायलॉज के तहत फ्लैटों के निर्माण से मिलने वाला डेवलपमेंट शुल्क नगर निगम को ट्रांसफर किया जाएगा। इस रकम से कालोनियों में सीवर लाइनें, पेयजल लाइनें आदि अपग्रेड की जाएंगी।
बिगड़ न जाए कालोनियों की सूरत
निगम अधिकारियों को चिंता इस बात की है कि नए बिल्डिंग बायलॉज से कालोनियों की सूरत न बिगड़ जाए।
कालोनियों से मिलने वाले डेवलपमेंट शुल्क की रकम बेहद कम होगी जबकि सीवर, वाटर और ड्रेनेज सिस्टम को अपग्रेड करने में कई गुना बजट खर्च होगा। ऐसे में पैसे की कमी से निगम इन कालोनियों को मेंटेन नहीं कर पाएगा।