उसके चेहरे में बसी है एक पीड़ा, वह हंसती है तो वह और उभर आती है ...। नारी जीवन की पीड़ा को समझना आसान नहीं, और उसे शब्दों में पिरोकर साहित्य सृजन और भी मुश्किल है। ऐसे ही साहित्यकार प्रयाग शुक्ल अमर उजाला के अभियान ‘अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स’ से जुड़े चुके हैं।
शरद जोशी सम्मान, द्विजदेव सम्मान जैसे कई पुरस्कारों के विजेता प्रयाग शुक्ल ने सेक्टर-93 स्थित अपने आवास पर अपराजिता का पोस्टर लांच किया। प्रयाग शुक्ल ने अमर उजाला के अभियान की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह अभियान एक बेहतर उद्देश्य के लिए शुरू हुआ है।
हंसती हुई लड़की में ... जीवन जीवन इतना जीवन । प्रयाग शुक्ल की यह कविता इस बात की बानगी है कि किस तरह वह नारी में जीवन की प्रेरणा का दर्शन करते हैं। उन्होंने बताया कि जीवन के हर कदम पर उन्हें महिलाओं का सहयोग और उनसे प्रेरणा मिली है।
बचपन से बहन उसके बाद पत्नी और फिर दो बेटियां उनके जीवन में मार्गदर्शक बनी। उन्होंने बताया कि जब उनकी शादी हुई थी तो उनके आर्थिक हालात अच्छे नहीं थे। घर में एक दो बर्तन के सिवा कुछ नहीं था । फिर भी उनकी पत्नी ने उनका हाथ थामा । एक समय ऐसा भी आया जब उनकी पत्नी ने अपनी नौकरी छोड़ उन्हें उनके सपने पूरे करने में सहयोग दिया।
प्रयाग शुक्ल ने कहा कि सुंदरता और कोमलता जीवन की सार्थकता इन्हीं में है , लेकिन अफसोस की बात है कि आज यह दोनों चीजें घटती जा रही हैं। नारी ही सकारात्मक सोच को आगे ले जा सकती है। लोग कहते हैं भारतीय नारी महान है और इस महानता की ओट में उसका दायरा निश्चित कर देते हैं।
जबकि नारी तो हर देश , काल, धर्म में महान ही है। हम यदि पुरातन ग्रंथों का अध्ययन करें तो पता चलेगा कि पुरातन काल में नारी ने कैसे सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है । लेकिन धीरे-धीरे नारी को संकुचित दायरों में बाधा गया।
जब मैं करियर की शुरूआत मैं दिल्ली आया था तो यह देखता था कि मेडिकल जैसे कुछ क्षेत्रों को छोड़कर नारी कहीं देखने को नहीं मिलती । लेकिन अब समय फिर बदल रहा है नारी फिर हर दिशा में आगे बढ़ रही है । ‘अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स’ जैसे अभियान ऐसी आगे बढ़ने वाली महिलाओं के प्रेरणास्रोत बनेंगे।