नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है, जिस पर सिविल सेवक का रूप धारण कर वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से संवेदनशील और गोपनीय जानकारी हासिल करने का आरोप है। अदालत ने पुलिस की इस निष्क्रियता पर गंभीर चिंता व्यक्त की कि सुप्रीम कोर्ट तक अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज होने के बावजूद आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया।
न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता के तहत दर्ज एफआईआर से जुड़े मामले में मनोज कुमार झा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए यह आदेश पारित किया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, झा ने सिविल सेवक का रूप धारण कर विभिन्न वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से संवेदनशील जानकारी हासिल करने का प्रयास किया। उन पर पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश का रूप धारण करने का भी आरोप है। आवेदक की ओर से दलील दी गई कि पहले की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज होने और सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा विशेष अनुमति याचिका खारिज किए जाने के बावजूद जांच एजेंसी ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया, जिससे साफ है कि हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है। राज्य ने याचिका का विरोध किया और पुलिस की निष्क्रियता पर चिंता जताई।
अदालत ने कहा पुलिस कर रही आरोपी की मदद : न्यायमूर्ति कठपालिया ने टिप्पणी की कि सुप्रीम कोर्ट तक बार-बार अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज होने के बावजूद स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए कोई कदम नहीं उठाया। इससे यह आभास होता है कि आरोपी की मदद की जा रही है और कुछ और भी है जो नजर नहीं आ रहा। अदालत ने आदेश की एक प्रति संबंधित डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस को वरिष्ठ स्थायी अधिवक्ता के माध्यम से भेजने का निर्देश दिया, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।