उन्होंने बताया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक अधिनियम के तहत 24 शक्तिशाली एंटीबायोटिक दवाएं शामिल हैं, जिनपर लाल रंग से लेबलिंग करना अनिवार्य है। फार्मासिस्ट के लिए भी निर्देश हैं कि मरीज, डॉक्टर, दवा का नाम, डोज आदि की जानकारी अलग से एक रजिस्टर पर नोट करके रखते चलें।
ऐसे नुकसान देती हैं ये दवाएं
डॉक्टरों के अनुसार इलाज योग्य जीवाणु एंटीबायोटिक्स से बचने के लिए तेजी से विकसित होते हैं, जिससे दवा बेअसर होने लगती है। यह प्रक्रिया न केवल दवाओं के अनुचित उपयोग के कारण, बल्कि खेती बाड़ी के गलत तरीकों के कारण भी बढ़ रही है। डॉक्टरों के साथ-साथ मरीजों को भी एंटीबायोटिक दवाओं के सही उपयोग के बारे में पता होना चाहिए। ओवर-प्रेस्क्रिप्शन और खुद से दवा खरीदना दोनों की जांच होनी चाहिए।