1984 सिख दंगा मामले में दोषी यशपाल सिंह ने अपनी फांसी की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसकी सुनवाई को अदालत ने 29 जनवरी तक के लिए टाल दिया है। गौरतलब है कि दूसरी ओर जांच एजेंसी ने उसकी फांसी की सजा पर मोहर लगाने के लिए हाईकोर्ट में संदर्भ पेश किया है। निचली अदालत ने यशपाल को फांसी तो दूसरे दोषी नरेश को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
सिख दंगे का यह पहला मामला था, जिसमें अभियुक्त को फांसी की सजा दी गई है। यह फैसला घटना के 34 सालों बाद आया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने यशपाल की अपील व जमानत याचिका पर विशेष जांच दल (एसआईटी) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। वहीं दूसरी ओर अभियुक्त को मिली फांसी की सजा सुनिश्चित करने के सरकार की अपील पर पीठ ने अभियुक्त से जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट इन दोनों याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 19 दिसंबर की तारीख तय की थी। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के बाद अभियुक्त यशपाल की पेशी को लेकर वारंट जारी किया है। वह अभी तिहाड़ जेल में है।
निचली अदालत ने नरेश सेहरावत को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले को वह जल्द ही चुनौती दे सकता है। निचली अदालत ने दोनों अभियुक्तों को 14 नवंबर को दोषी ठहराया था और 20 नवंबर को सजा सुनाई थी। अदालत ने दोनों पर 35-35 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।