पोर्टल के मुताबिक इन अधिकारियों की स्वीकारोक्ति खुलासा करती है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने सिखों के खिलाफ सांप्रदायिक भावनाएं धीरे-धीरे भड़कने की चेतावनियों को अनसुना किया और पुलिस नियंत्रण कक्ष को मिलने वाले आगजनी एवं दंगों के समाचारों के केवल दो प्रतिशत संदेशों को ही दर्ज किया गया।
यही नहीं वरिष्ठ अधिकारियों के कार्रवाई नहीं करने के सबूतों को मिटाने के लिए लॉग बुक को सुविधाजनक तरीके से बदला भी गया जबकि कुछ अन्य अधिकारियों ने तबादला होने की सजा मिलने के डर से कार्रवाई नहीं की।
कोबरापोस्ट ने दावा किया कि इन कुछ पुलिस अधिकारियों ने दंगों संबंधी अपराधों को कम करने के लिए पीड़ितों के शव कहीं और फेंक दिए और पुलिस को निर्देश देते हुए संदेश प्रसारित किए गए कि वह उन दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करे जो इंदिरा गांधी जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे।
कोबरापोस्ट के मुताबिक इनमें से अधिकतर ने खुले तौर पर एक बल के रूप में अपनी नाकामी स्वीकार की जबकि कुछ ने माना कि पुलिस बल के शीर्ष अधिकारियों ने सिखों को सबक सिखाने के लिए उस समय की सरकार के साथ साठगांठ की।
पोर्टल का दावा है कि यह स्टिंग पिछले एक वर्ष में किया गया, जिसकी अधिकतर शूटिंग पिछले दो महीने में की गई है। इस स्टिंग का मकसद 1984 की उस त्रासदी का अवलोकन करना था, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुई थी।
पुलिस ने दर्ज नहीं कराने दी प्राथमिकी
कोबरापोस्ट का कहना है कि पटेल नगर के तत्कालीन एसएचओ अमरीक सिंह भुल्लर ने अपने हलफनामे में कुछ स्थानीय नेताओं पर भड़काने और यहां तक कि गुस्साई भीड़ का नेतृत्व करने का आरोप लगाते हुए उनके नाम भी लिए हैं।
कल्याण पुरी में 500 से 600 सिखों को मारा गया। पुलिस ने दंगा पीड़ितों को प्राथमिकी भी दर्ज नहीं कराने दी और जब उन्होंने प्राथमिकी दर्ज की तो भी उन्होंने विभिन्न स्थानों पर हुई हत्या एवं आगजनी के मामलों को एक ही प्राथमिकी में जोड़ दिया।
दंगों के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने अपने अधीनस्थों को दंगाइयों पर गोलियां नहीं चलाने दीं और पुलिस ने जिन स्थानों पर आगजनी के मामले दर्ज किए थे, दमकल की गाड़ियों ने भी वहां जाने से इनकार कर दिया।
समाचार पोर्टल ने स्टिंग आपरेशन के जरिए दावा किया है कि 84 के दंगों के समय तत्कालीन सरकार सिख दंगों को रोकने के लिए कदम उठाने में नाकाम रही और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने सिखों को सबक सिखाने के लिए तत्कालीन सरकार के साथ सांठ गांठ की।
गले की हड्डी बने सिख दंगे को कांग्रेस ने फिर दुखद, खेदपूर्ण और अमानवीय बताकर डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की है। पार्टी ने कहा है कि इस हादसे के लिए जो भी दोषी होगा, चाहे वह आरएसएस, भाजपा या कांग्रेस का कार्यकर्त्ता हो, उसे सजा मिलनी चाहिए। पार्टी ने खासतौर से कहा कि इस मामले में वाजपेयी के चुनावी एजेंट भी आरोपी हैं।
माफी मांग चुके हैं सोनिया, मनमोहन: कांग्रेस
कोबरापोस्ट के खुलासे में सीधे रूप से कांग्रेस और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार पर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी बचाव में है, जबकि भाजपा आक्रामक हो गई है। भाजपा कांग्रेस से आठ हजार सिखों की हत्या का मुद्दा उठाकर जवाब मांग रही है।
कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह इस मामले में माफी मांग चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में भाजपा कार्यकर्ता, वाजपेयी के चुनाव एजेंट और कांग्रेस कार्यकर्ता जांच के घेरे में हैं। इस हादसे में जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।