उच्च न्यायालय ने कहा कि उम्मीद है कि स्ट्रीट वेंडर टीका लगवाने के लिए सक्रिय कदम उठाएंगे ताकि कोविड-19 की तीसरी लहर से बचा जा सके और राष्ट्रीय राजधानी में हाल ही में कोरोना महामारी में देखी गई वृद्धि का सामना न करना पड़े। अदालत ने यह टिप्पणी सप्ताहिक बाजार पटरी एसोसिएशन की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की जिसमें बाजारों को खोलने के बावजूद सप्ताहिक बाजार को पूरी तरह न खोलने के निर्णय को चुनौती दी गई है। अदालत ने दिल्ली सरकार को इस मुद्दे पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने दिल्ली सरकार को कहा कि वह अधिक से अधिक साप्ताहिक बाजारों को शुरु करने की अनुमति देने के मुद्दे पर विचार करे। अदालत ने कहा समाज का एक ऐसा तबका है जो केवल इन बाजारों से चीजें खरीदता है क्योंकि वे अन्य दुकानों से मंहगी बिकने वाली वस्तुओं का खर्च नहीं उठा सकता। अदालत ने डीडीएमए को भी सभी तथ्यों को ध्यान में रखने हुए सहानुभूति पूर्ण इस मुद्दे पर विचार करने का कहा है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि वह दिल्ली सरकार को सभी साप्ताहिक बाजारों को शुरु करने की अनुमति देने के लिए नहीं कह रही है और अधिकारी इस मुद्दे पर विचार करेंगे और फिर कोई निर्णय लेंगे। अदालत ने कहा सरकार शर्तें रख सकती है ताकि इन बाजारों में भीड़ न हो।
अदालत ने कहा उन्हें यह भी उम्मीद है कि स्ट्रीट वेंडर्स भी टीका लगवाने के लिए प्रो-एक्टिव कदम उठाएंगे ताकि हम तीसरी लहर से बच सकें और दिल्ली की एनसीटी को फिश्र से ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।वर्तमान में कोविड -19 प्रतिबंधों के कारण दिल्ली सरकार ने साप्ताहिक बाजारों को खोलने की अनुमति दी है, लेकिन प्रत्येक नगर निगम क्षेत्र में केवल 50 प्रतिशत विक्रेताओं और एक बाजार के साथ।
एसोसिएशन की और से पेश अधिवक्ता रजत वाधवा ने कहा कि 13 जून को अन्य गतिविधियों पर प्रतिबंधों में ढील दी गई थी और गरीब वर्ग के सबसे गरीब वर्ग से ताल्लुक रखने वाले इन वेंडरों को परेशानी हो रही है। अदालत ने कहा इन बाजारों के खुलने से भीड़ बढ़ेगी। इस सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर नगर निगम जोन में केवल एक साप्ताहिक बाजार खोलने की अनुमति दी जाती है तो अधिक भीड़ होगी क्योंकि ऐसे लोग हैं जो केवल इन बाजारों से ही सामान खरीदते हैं।
दिल्ली सरकार के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि दिल्ली में अभी भी प्रति दिन औसतन 45 से 50 मामले सामने आ रहे है और रविवार को 85 मामले सामने आए है। सरकार सभी तथ्यों को देखते हुए इस मुद्दे पर विचार कर रही है।