बड़े नालों के जरिए प्लास्टिक, पॉलीथिन, खाली बोतलें और अन्य ठोस घरेलू कचरा सीधे यमुना में प्रवाहित होने से बचाने के लिए 80 मीटर लंबा फ्लोटिंग ट्रैश बूम लगाया जाएगा।
राजधानी में यमुना नदी को कचरा मुक्त बनाने के लिए प्रशासन ने एक आधुनिक तकनीकी समाधान अपनाया है। बड़े नालों के जरिए प्लास्टिक, पॉलीथिन, खाली बोतलें और अन्य ठोस घरेलू कचरा सीधे यमुना में प्रवाहित होने से बचाने के लिए 80 मीटर लंबा फ्लोटिंग ट्रैश बूम लगाया जाएगा।
विज्ञापन
इस पर करीब 4.07 लाख रुपये खर्च होंगे। अधिकारियों का दावा है कि यह ट्रैश बूम पानी की सतह पर तैरते हुए एक बैरियर की तरह काम करेगा। जैसे ही नालों का पानी आगे बढ़ेगा, यह बूम कचरे को एक स्थान पर एकत्र कर लेगा, जहां से उसे मशीनों या मैन्युअल तरीके से नियमित रूप से निकाला जा सकेगा। इससे कचरा नदी की मुख्य धारा तक नहीं पहुंच पाएगा।
जलभराव और बदबू से मिलेगी राहत
नालों में कचरा जमा होने से न केवल नदी प्रदूषित होती है, बल्कि मानसून के दौरान नालों में रुकावट आने से सड़कों पर जलभराव की गंभीर समस्या भी पैदा हो जाती है। व्यवस्था से पानी का बहाव सुचारू रहेगा और स्थानीय निवासियों को गंदगी व बदबू से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
विज्ञापन
हालांकि जब तक सड़कों और नालों में कचरा फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी और अपशिष्ट प्रबंधन को जमीनी स्तर पर मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसी योजनाओं का पूर्ण लाभ मिलना मुश्किल है।