समाज सेवी अन्ना हजारे केंद्र में लोकपाल की नियुक्ति को लेकर 30 जनवरी से एक बार फिर अनशन करेंगे। हालांकि, दिल्ली की जगह इस बार उनका आमरण अनशन रालेगण सिद्धि में होगा। कांस्टीट्यूशन क्लब में अन्ना हजारे ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। इस मौके पर उन्होंने लोकपाल की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाया। साथ ही माना कि आज अगर लोकपाल की नियुक्ति हो गई होती तो देश में राफेल घोटाला न हो पाता।
अन्ना हजारे का कहना है कि लोकपाल की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार कतई संजीदा नहीं है और इसे टाल रही है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में केंद्र सरकार को फटकार भी लगाई है। उन्होंने ने कहा कि पिछली बार सरकार ने लिखित में कहा था कि वह लोकपाल कानून को लागू करेंगे। साथ ही किसानों को उनकी लागत का 1.5 गुना समर्थन मूल्य देगी, लेकिन दोनों मसलों पर कुछ खास नहीं हुआ। अब आगे उन्हें किसी दूसरे झूठे वादे में नहीं फंसना है। इस बार की लड़ाई आर-पार की होगी। सांस चलने तक आंदोलन चलता रहेगा। अन्ना हजारे ने दावा किया कि 30 जनवरी से शुरू हो रहा आंदोलन सिर्फ रालेगण सिद्धि में नहीं होगा। उनके समर्थक देशभर के अलग-अलग हिस्सों में अनशन पर बैठेंगे। राष्ट्रीय किसान महापंचायत आंदोलन का पूरी तरह समर्थन कर रही है।
राफेल पर सार्वजनिक करेंगे जानकारियां
अन्ना हजारे ने कहा कि अगर लोकपाल की नियुक्ति हुई होती तो राफेल जैसा घोटाला देश में नहीं होता। उनका दावा है कि राफेल घोटाले से जुड़े पर्याप्त दस्तावेज उनके पास हैं, अगले दो दिनों में इसका अध्ययन करके इसके बारे में जानकारियां सार्वजनिक करेंगे। यह समझ में न आने वाली बात है कि कैसे एक महीने पुरानी किसी कंपनी को राफेल समझौते में पार्टनर बना लिया गया।
अन्ना हजारे की मांगें
केंद्र में लोकपाल व राज्यों की लोकायुक्त की नियुक्ति हो।
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य हो।
किसानों को पूरी तरह से कर्ज मुक्त किया जाए।
फल, सब्जी व दूध का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाए।
किसानों की न्यूनतम आय सुनिश्चित हो।