अरविंद केजरीवाल ने अन्ना के मंच से कहा कि जब तक केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी उन्होंने जमकर घोटाले किए। कांग्रेस सरकार ने लोगों से उनकी जमीनें छीन ली।
उन्हें घमंड हो गया था कि वह जो चाहे कर सकते हैं लेकिन जनता ने उन्हें सबक सिखाया और जड़ से उखाड़ फेंका। मई में हुए चुनावों में देश्ा ने भारतीय जनता पार्टी को बहुमत दिया। लोगों को उम्मीद थी कि बीजेपी वाले कुछ करेंगे लेकिन उन्होंने भी कुछ नहीं किया।
असल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार प्रॉपर्टी डीलर की तरह काम करने लगी। केजरीवाल ने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि देश की जनता पर बुलडोजर चलाने से नहीं चलेगा। सबको साथ लेकर चलना होगा वरना जनता आप पर बुलडोजर चला देगी।
केजरीवाल ने कहा कि वर्तमान अध्यादेश किसान और जनता विरोधी है। हम इसकी कड़ी आलोचना और विरोध करते हैं। अगर यह कानून संसद में पास हो गया तो केंद सरकार पूंजीपतियों के दलाल के तौर पर काम करने लगेगी।
केजरीवाल ने दिल्ली की जनता को यह यकीन दिलाया कि दिल्ली में किसी भी गरीब से उसकी जमीन नहीं छीनी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसान या आम जनता विकास के लिए अपनी जमीन खुद ही सरकार को देती है उनसे छीनने की जरूरत ही नहीं है।
केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में इलेक्शन के दौरान लोगों ने खुद उनसे कहा कि स्कूल खोलने के लिए वह अपनी जमीन देने काो तैयार हैं।
अन्ना के कदम रखने से शुद्घ हो जाएगा सचिवालय
अरविंद केजरीवाल ने इस मौके पर अन्ना हजारे को दिल्ली में सचिवालय आने का न्यौता भी दिया। केजरीवाल ने कहा कि अगर उनके पास समय हो तो वह दस मिनट के लिए दिल्ली सरकार के सचिवालय आएं। उनके आने से सचिवालय शुद्घ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अन्ना जी सचिवालय में आएं और हर विभाग के प्रमुखों से मिलें और उन्हें मार्गदर्शन दें।
अंत में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह अन्ना को अपना गुरु मानते हैं, उन्हें पिता समान मानते हैं। अरविंद ने खुद को अन्ना के आंदोलन का समर्थक बताया और कहा कि वह इस आंदोलन में अन्ना जी के साथ हैं। केजरीवाल जब आंदोलन स्थल पहुंचे तो वह मंच से नीचे खड़े थे। कुछ देर वह नीचे ही रहे लेकिन फिर मंच पर मौजूद लोगों ने उनका हाथ पकड़कर सीधे उन्हें ऊपर खींच लिया।
इसके बाद लोगों की भीड़ केजरीवाल के पीछे लग गई। मौजूद लोग अपने-अपने कैमरों से केजरीवाल की तस्वीर उतारने लगे। वहां पहले से मौजूद वाइको ने भी केजरीवाल को गले लगाकर उनका स्वागत किया।
मंच पर राजनीतिज्ञों के खिलाफ थे अन्ना
एक ओर जंतर मंतर पर अन्ना हजारे भूमि अधिग्रहण कानून के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं तो वहीं, संसद में इसी बिल पर चर्चा जारी है।
भूमि अधिग्रहण कानून के विरोध में 20 फरवरी से शुरु हुआ किसानों का आंदोलन संसद के बजट सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले सोमवार को दिल्ली के जंतर मंतर पहुंचा। सोमवार को जंतर मंतर के मंच से अन्ना ने हुंकार भरी कि अगर सरकार ने बिल वापस नहीं लिया तो वह जेल भरो आंदालन करेंगे।
इस दौरान आम आदमी पार्टी के नेता कुमार विश्वास ने अन्ना के आंदोलन में भाग लेने की मंशा जाहिर की। अन्ना ने इस प्रस्ताव पर तीखा जवाब देते हुए कहा कि अगर राजनीतिक पार्टियों के लोग मंच पर आएंगे तो जनता इसे राजनीतिक आंदोलन समझ लेगी।
अन्ना ने कुमार विश्वास को मंच पर आने की इजाजत नहीं दी। लेकिन अरिंवद केजरीवाल से मुलाकात के बाद अन्ना का दिल पिघल गया और उन्होंने कहा कि अगर राज्यों के मुख्यमंत्री आंदोलन का समर्थन करना चाहते हैं तो उन्हें मंच पर आने की अनुमति दी जा सकती है।
केजरीवाल ने अन्ना से मांगी इजाजत
बता दें कि सोमवार शाम को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने महाराष्ट्र सदन में अन्ना हजारे से मुलाकात की और आंदोलन में शामिल होने की मंशा जाहिर की थी।
अरविंद केजरीवाल से मुलाकात के बाद अन्ना के तेवर में सोमवार शाम तक नरमी आ गई और उन्होंने अरविंद केजरीवाल को आंदोलन में भाग लेने की इजाजत दे दी।
अन्ना ने यह भी कहा कि अगर अन्य मुख्यमंत्री आंदोलन में भाग लेना चाहते हैं तो उन्हें मंच पर आने की इजाजत दी जा सकती है।
अन्ना के मंच पर दिखेंगे केजरीवाल
संभावना व्यक्त की जा रही थी कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मंगलवार दोपहर जंतर मंतर जाएंगे और अन्ना के आंदोलन में भाग लेंगे।
सोमवार को अन्ना से मुलाकार के दौरान अरविंद केजरीवाल के साथ दिल्ली की डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और 'आप' नेता आशीष खेतान भी मौजूद थे।
मुलाकात के दौरान आम आदमी पार्टी के दोनों ही शीर्ष नेताओं ने अन्ना के पैर छूकर उनसे आर्शीवाद भी लिया। मुलाकात के बाद अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि अन्ना जी का जीवन हमारे लिए प्रेरणा है।