अनाज मंडी के हादसे में बिहार के मूल निवासी राजू की भी मौत हो गई। सोमवार को राजू के साथी लोकनायक अस्पताल की मोर्चरी के बाहर काफी गुस्से में थे। पूछताछ में पता चला कि रविवार शाम सदर थाना पुलिस राजू के भाई दुलारे को साथ ले गई है। तब से सोमवार शाम 4 बजे तक दुलारे का कोई अता-पता नहीं है। पुलिस भी उन्हें कुछ नहीं बता रही। उधर, दुलारे की मौजूदगी के बगैर राजू का पोस्टमार्टम करने से भी इनकार कर दिया है।
मोहम्मद करीम ने बताया कि वे बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी हैं। उनके गांव के ही बबलू, राजू और तौफीक की मौत हो चुकी है। रविवार शाम करीब 5 बजे वे अपने साथियों और दुलारे के साथ मोर्चरी पर ही थे। सादे कपड़ों में कुछ लोग आए और कहा कि वे सदर पुलिस थाने से हैं और कुछ बात करना चाहते हैं। धीरे-धीरे बात करते हुए वे दुलारे को आगे तक ले गए और फिर जीप में बैठाकर ले गए। साथी पीछे दौड़े तो पुलिसवालों ने कहा कि वे उसे छोड़ देंगे।
सोमवार शाम तक भी दुलारे का अता-पता नहीं है। वे मोर्चरी के आगे बेबस खड़े हैं। तौफीक और बबलू का पोस्टमार्टम हो चुका है, लेकिन वे साथ ही राजू का शव भी ले जाना चाहते हैं। मोर्चरी में पुलिस कह रही है कि जब तक राजू के परिवार से कोई नहीं आएगा, तब तक पोस्टमार्टम नहीं होगा। राजू के घर में बुजुर्ग मां-बाप हैं। उन्हें इतनी जल्दी दिल्ली बुलाना भी संभव नहीं है। दुलारे और राजू दोनों सगे भाई थे और मजदूरी करते थे। दुलारे दिल्ली के बाड़ा हिंदूराव इलाके में नौकरी करता है। राजू अनाज मंडी स्थित फैक्टरी में टोपी बनाने का काम करता था।
उधर, इन आरोपों के संबंध में सदर थाने के एसएचओ से बातचीत की गई तो उन्होंने दुलारे नाम के किसी भी व्यक्ति को हिरासत में लेने से इनकार कर दिया। ऐसे में बड़ा सवाल है कि दुलारे कहां लापता हो गया? मोर्चरी में उसने भाई राजू और गांव के ही तौफीक के शव की शिनाख्त भी की थी। सादे कपड़ों में आए कथित पुलिसवाले कौन थे? ऐसे तमाम सवालों को लेकर दिनभर करीम और उनके साथी मीडिया और पुलिस से जवाब मांगते रहे।