अनाज मंडी अग्निकांड में 43 लोगों की जान चली गई और इस पर राजनीति भी खूब चल रही है। अब इलाके में अवैध रूप से चल रही फैक्टरियों पर सीलिंग की तलवार लटक गई है। बिजली कंपनियां भी सख्ती दिखा रही हैं और कमर्शियल की जगह इंडस्ट्रियल मीटर के माध्यम से ही बिजली आपूर्ति देने की नीति तैयार कर रही हैं।
प्रशासन का दबाव भी अवैध रूप से फैक्टरी चलाने वालों पर शिकंजा कसने का है। हालांकि हर वर्ग की चिंता अलग है। मजदूर अपने रोजगार को लेकर परेशान हैं तो कारोबारी अपने उद्योग-धंधों के भविष्य के लिए।
उधर, नेताजी को चिंता सता रही है कि मजदूर पलायन करेंगे तो आगामी विधानसभा चुनाव में न तो झंडा ढोने वाले मिलेंगे और न ही पदयात्रा व जनसभा-रैली में भीड़ बढ़ाने वाले।
मजदूरों को रोजगार छिनने का डर
पूर्वांचल से दिल्ली में काम करने आए मजदूरों की चिंता यह है कि अब उनका रोजगार छिन जाएगा। अवैध रूप से चल रहे उद्योग प्रशासन के दबाव में बंद हो गए हैं। गांधी नगर में काम करने वाले एक मजदूर ने बताया कि फैक्टरी मालिक व ठेकेदार ने काम पर नहीं आने और गांव वापस जाने को कहा है। जिस ठेकेदार के माध्यम से वह गांव से दिल्ली पहुंचा था, वह भी इन दिनों संपर्क नहीं साध रहा है।