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अभी भी ज्वालामुखी बन सकती है फैक्टरी, ग्राउंड फ्लोर पर रखे हैं कई ट्रक गत्ते के कार्टन और डिब्बे

Tue, 10 Dec 2019 08:53 PM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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अनाज मंडी अग्निकांड - फोटो : अमर उजाला
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अनाज मंडी इलाके में मौत की फैक्टरी में अब भी इतना ज्वलनशील सामान पड़ा है, जिससे वह कभी भी ज्वालामुखी बन सकती है। मंगलवार को पुलिस ने छानबीन के लिए फैक्टरी का शटर उठाया तो पता चला कि ग्राउंड फ्लोर पर ही कई ट्रक गत्ते के कार्टन व डिब्बे रखे हुए थे। इसके अलावा कई कट्टों में प्लास्टिक का सामान भरा था। इनमें  आग लगती तो आसपास की दूसरी इमारतों को भी खासा नुकसान होता। आग दूसरी मंजिल से होकर ऊपर की ओर गई, जिससे धुआं ज्यादा हुआ और दम घुटने से मजदूरों की मौत हुई।
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छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला है कि फैक्टरी मालिक ने पग-पग पर लापरवाही बरती। इमारत में बस नाम के लिए अग्रिशमन यंत्र लगाए हुए थे। तीनों भाई रेहान, इमरान और शान की फैक्टरी में जाने के लिए एक ही जीना था। जीने के ठीक सामने मीटर लगा हुआ है, जहां पर बिजली के नंगे तार लटक रहे थे। 

तारों के नजदीक ही गत्ते के कार्टन का ढेर लगा था। 600 गज की इमारत में इसी मीटर से बिजली की सप्लाई हो रही थी। जांच अधिकारी ने बताया कि यह भी पता चला है कि रात के समय इस इमारत में कटिया लगाकर फैक्टरी में काम करने वाले लोग काम करते थे। ऐसे में इस बात की पूरी संभावना था कि कभी भी शॉर्ट सर्किट की वजह से यहां आग लग सकती थी और ऐसा ही हुआ।
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अनाज मंडी की 95 फीसदी इमारतों में होती व्यावसायिक गतिविधियां

रानी झांसी रोड इलाके की अनाज मंडी में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां पर व्यावसायिक गतिविधियां न चल रही हों। जिस गली में भी घुसेंगे वहां हर मकान में ग्राउंड फ्लोर पर लगा शटर जरूर दिखाई देगा। यहां रहने वाले लोगों ने अपनी प्रॉपर्टी के ज्यादातर हिस्से को किराए पर फैक्टरी मालिकों को दिया हुआ है। ग्राउंड फ्लोर पर ज्यादातर लोगों ने अपने-अपने गोदाम बनाए हुए हैं, जहां पर प्लास्टिक या कागज का सामान रखा जाता है।
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