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दिल्ली: ब्रिक्स सम्मेलन के आखिरी दिन तक रहेगा अभेद्य सुरक्षा घेरा, साइबर हमले से लेकर संदिग्ध चेहरों तक पर नजर

Sat, 12 Sep 2026 08:13 AM IST
Vijay Singh Pundir अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

सुरक्षा एजेंसियों का जोर किसी घटना के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय खतरे के संकेत पहले ही पकड़ने पर है। इसके लिए साइबर मॉनिटरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरे, इंटेलिजेंस शेयरिंग और थ्रेट एनालिसिस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर सभी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन दिवस पर विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और शीर्ष प्रतिनिधियों की सुरक्षा के लिए राजधानी में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था जारी रहेगी। भारत मंडपम, विदेशी मेहमानों के ठहरने वाले होटल, एयरपोर्ट और वीवीआईपी आवागमन वाले मार्गों को हाईटेक सिक्योरिटी ग्रिड से जोड़ा गया है। 

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सुरक्षा एजेंसियों का जोर किसी घटना के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय खतरे के संकेत पहले ही पकड़ने पर है। इसके लिए साइबर मॉनिटरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कैमरे, इंटेलिजेंस शेयरिंग और थ्रेट एनालिसिस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

 आईबी सूत्रों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था में केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच रियल-टाइम सूचना साझा करने की व्यवस्था अहम है। अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले इनपुट को एक साथ रखकर संदिग्ध गतिविधियों और खतरों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। इससे किसी खतरे की सूचना मिलने पर संबंधित एजेंसी को तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
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सुरक्षा ग्रिड का एक प्रमुख हिस्सा मल्टी-एजेंसी सेंटर (एमएसी) है। इसके जरिये साइबर हमले, हैकिंग और साइबर जासूसी से जुड़े इनपुट की निगरानी की जाएगी। किसी संदिग्ध साइबर गतिविधि की जानकारी मिलने पर उसे संबंधित सुरक्षा और जांच एजेंसियों के साथ साझा करने की व्यवस्था है। यानी सम्मेलन की सुरक्षा अब केवल जमीन पर मौजूद सुरक्षा बलों और बैरिकेडिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर स्पेस की गतिविधियों को भी निगरानी के दायरे में रखा गया है। 

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नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (नेटग्रिड) के जरिये 20 से ज्यादा सरकारी और निजी एजेंसियों से जुड़े डेटा को रियल-टाइम में साझा करने की व्यवस्था की गई है। इसका इस्तेमाल इनपुट के सत्यापन, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और खतरे का आकलन करने में किया जा रहा है। विभिन्न एजेंसियों के डेटा को एक साथ उपलब्ध कराने से सुरक्षा तंत्र को संभावित खतरे की तस्वीर ज्यादा तेजी से समझने में मदद मिलेगी।

एआई कैमरों से चेहरों की पहचान
सम्मेलन स्थल और संवेदनशील इलाकों में एआई तथा फेस-रिकग्निशन कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है। कैमरों की मदद से संदिग्ध चेहरों और गतिविधियों की पहचान करने की कोशिश होगी। हाईटेक सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए एआई आधारित अन्य प्रणालियों को भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया गया है।

एयरपोर्ट से होटल तक निगरानी
विदेशी मेहमानों की आवाजाही वाले एयरपोर्ट, भारत मंडपम, वीवीआईपी होटलों और इन्हें जोड़ने वाली सड़कों पर सीसीटीवी नेटवर्क तथा अन्य सर्विलांस सिस्टम से निगरानी रखी जाएगी। वीवीआईपी रूट की ट्रैफिक मैपिंग के जरिये आवागमन को नियंत्रित किया जाएगा। किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल रिस्पॉन्स सिस्टम भी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। इस तरह ब्रिक्स के अंतिम दिन सुरक्षा की कई परतें एक साथ सक्रिय रहेंगी। जमीन पर सुरक्षा बलों की तैनाती से लेकर कैमरों की निगरानी और साइबर स्पेस में गतिविधियों पर नजर तक। लक्ष्य स्पष्ट है कि संभावित खतरे का पता घटना से पहले लगाया जाए और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।

इन एजेंसियों के बीच है गहरा तालमेल 
सुरक्षा के लिए बनाए गए इंटेलिजेंस ग्रिड में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ खुफिया ब्यूरो (आईबी), रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) जैसी प्रमुख एजेंसियों के बीच सूचनाओं का लगातार आदान-प्रदान किया जाता है। साइबर सुरक्षा से जुड़े इनपुट पर संबंधित तकनीकी और साइबर इकाइयों की भी नजर है, जबकि संदिग्ध गतिविधियों और चेहरों की पहचान के लिए स्थानीय पुलिस तथा अन्य सुरक्षा तंत्र को अलर्ट रखा गया है।

आला अधिकारी खुद सड़कों पर उतरे
भारत मंडपम में 11 से 13 सितंबर तक होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। आयोजन स्थल और नई दिल्ली जिले में अभेद्य सुरक्षा घेरा है तो राजधानी के बाकी जिलों में भी पुलिस हाई अलर्ट पर है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा को सिर्फ वीवीआईपी रूट और आयोजन स्थल तक सीमित नहीं रखा है। सभी जिलों में स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ाने, संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत पहचान करने और जरूरत पड़ने पर अचानक जांच के निर्देश दिए गए हैं।

जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी खुद मैदान में उतरकर सुरक्षा व्यवस्था परख रहे हैं। संवेदनशील इलाकों में पैदल गश्त के साथ पुलिसकर्मियों की तैनाती और सतर्कता की जांच की जा रही है। पार्क, जंगल, खाली मैदान, नालों के आसपास और अन्य सुनसान इलाकों पर खास फोकस है। नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने चाणक्यपुरी स्थित रिज क्षेत्र का निरीक्षण किया। 
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