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डिफॉल्टर आम्रपाली पर बैंकों ने खूब की मेहरबानी, गिरवी प्रॉपर्टी पर देते रहे कर्ज

Sat, 27 Jul 2019 09:46 AM IST
पूजा त्रिपाठी अरविंद सिंह, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
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अगर आप प्राधिकरण से मोर्टगेज परमिशन लेकर बैंकों से लोन लेना चाहें, तो तमाम एनओसी व कागजात मांग लिए जाते हैं। उन्हें पूरा करने में ही आम आदमी परेशान हो जाता है, लेकिन आम्रपाली के मामले में सारे नियम-कायदे ताक पर रख दिए गए।

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बिल्डर को बैंकों से कर्ज लेने के लिए मोर्टगेज परमिशन देने में भी प्राधिकरण ने नियमों की अनदेखी की। इसका हश्र यह हुआ कि प्राधिकरण के 3600 करोड़ के साथ ही बैंकों के भी 1500 करोड़ रुपये डूब रहे हैं।

दरअसल, आम्रपाली ने 2010 में सिर्फ 10 फीसदी रकम (377 करोड़ रुपये) देकर करीब 306 एकड़ जमीन आवंटित करा ली थी। उसके बाद आम्रपाली की पहली किस्त से ही दिक्कत सामने आने लगी। उसने खरीदारों से मिलने वाली रकम न तो प्रोजेक्ट पूरा करने में लगाई और न ही प्राधिकरण की बकाया किस्त को जमा किया।
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उल्टे बैंक कर्ज के लिए कई बार प्राधिकरण से मोर्टगेज परमिशन भी लेता रहा, जबकि नियम यह है कि अगर कोई बिल्डर डिफॉल्टर हो जाता है तो उसे तब तक मोर्टगेज परमिशन प्राधिकरण नहीं देता है जब तक उसकी डिफॉल्ट किस्त नहीं आ जाती।

यह भी प्रावधान है कि अगर मोर्टगेज परमिशन दे भी दी, तो बैंकों से मिले लोन में से प्राधिकरण का पैसा चुकाना पड़ता है, जबकि आम्रपाली ने यह नहीं किया। उल्टे एक ही प्रॉपर्टी पर एक से अधिक बैंकों से कर्ज ले लिया।

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प्राधिकरण के साथ ही बैंक भी आम्रपाली पर मेहरबानी करने में पीछे नहीं रहे और एक बैंक के पास संपत्ति गिरवी होने के बावजूद दूसरे बैंक कर्ज देते रहे। सुप्रीम कोर्ट में खरीदारों की तरफ से केस लड़ रहे नोएडा एक्सटेंशन फ्लैट ऑनर्स वेलफेयर एसोसिएशन (नेफोवा) के अध्यक्ष अभिषेक कुमार के मुताबिक, आम्रपाली ने करीब 1500 करोड़ रुपये का कर्ज बैंकों से ले रखा है। अब मुख्यमंत्री की फटकार के बाद प्राधिकरण मोर्टगेज परमिशन देने में लापरवाही की रिपोर्ट तैयार करा रहा है। रिपोर्ट आने पर दोषी प्राधिकरण कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। 

पुनर्विचार याचिका पर विचार कर रहा प्राधिकरण
आम्रपाली पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का करीब 3600 करोड़ रुपये फंस गया है। इससे उबरने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए कानूनी सलाह ले रहा है। हालांकि प्राधिकरण के अधिकारी इस पर फिलहाल कुछ नहीं बोल रहे, लेकिन सूत्र बताते हैं कि प्राधिकरण के साथ ही बैंक भी सुप्रीम कोर्ट की शरण लेने पर विचार कर रहे हैं। 

आम्रपाली की राह पर कई और बिल्डर
आम्रपाली की तरह ही कई और भी बिल्डर हैं, जिन्होंने खरीदारों से पैसे तो ले लिए, लेकिन प्रोजेक्ट पूरे नहीं किए। इन पर भी प्राधिकरण अब तक कोई कार्रवाई नहीं कर सका है। दरअसल, योगी सरकार बनने के बाद खरीदारों को पजेशन दिलाने के लिए बिल्डरों का ऑडिट कराया गया। 103 बिल्डरों के प्रोजेक्ट में 1.20 लाख खरीदार फंसे हुए हैं। उनमें से पहले चरण में 48 बिल्डरों का ऑडिट कराया गया। इनकी रिपोर्ट भी आ गई। उनमें कुछ बिल्डरों ने फंड डायवर्ट किए हैं। उन पर भी प्राधिकरण कार्रवाई नहीं कर रहा। साथ ही बाकी के बिल्डरों का ऑडिट भी रोक दिया है। प्राधिकरण का कहना है कि रेरा ऐसे सभी मामलों की सुनवाई कर रहा है, इसलिए अब ऑडिट की जरूरत नहीं रही।
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