प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने कहा है कि आम आदमी पार्टी को ड्रामा करने अलावा कोई काम नहीं है।
उन्होंने
कहा कि जब भाजपा को सरकार बनाने के लिए राष्ट्रपति ने किसी तरह की अभी तक
पहल ही नहीं की है तो फिर उनसे शिकायत करने का कोई औचित्य ही नहीं है।
पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल राष्ट्रपति से मिलकर सिर्फ राजनीतिक रोटी
सेंक रहे है।
उपाध्याय ने कांग्रेस पार्टी पर भी निशाना साधा है।
उन्होंने कहा है कि कांग्रेस पार्टी झूठ की बुनियाद पर खड़ी है। कांग्रेस
शासन में दिल्ली का विकास तो हुआ नहीं और जब भाजपा दिल्ली के विकास कार्य
में जुटी है तो बीच में अड़ंगा डाल रहे है।
दिल्ली में सरकार बनाने
के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि जब दिल्ली के उपराज्यपाल उन्हें सरकार बनाने
के लिए आमंत्रित करेंगे तो भाजपा इस पर विचार करेगी।
'भाजपा सबसे बड़ी इकलौती पार्टी है'
दिल्ली में भाजपा ने सरकार बनाने की कसरतों पर कदम तेज कर दिए हैं। इसका संकेत खुद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने यह कहते हुए दे दिया है कि दिल्ली में भाजपा विधानसभा में सबसे बड़ी इकलौती पार्टी है और इस नाते उसका सरकार बनाने का अधिकार बनता है।
दिल्ली में सरकार बनाने और नहीं बनाने की जारी गतिविधयों के बीच आम आदमी पार्टी के पांच विधायकों का केजरीवाल के साथ राष्ट्रपति के पास नहीं जाने को लेकर भी भाजपा अपने लिए सकारात्मक संकेत मान रही है।
सरकार बनाने की अटकलों को लेकर पूछे जाने पर अमित शाह ने कहा है कि भाजपा को लोकसभा और दिल्ली में विधानसभा चुनाव में लोगों का जनादेश मिला और हम मानते है कि ये जनादेश बरकरार है।
साथ ही दिल्ली में जोड़ तोड़ सरकार बनाने में भाजपा को गुरेज नहीं है। अमित शाह ने इसका संकेत भी यह कहते हुए दे दिया कि सरकार बनाने के लिए समर्थन हासिल करने में कोई अनैतिकता नहीं होती। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सरकार बनाने की तैयारी पूरी है।
CM ही नहीं मंत्रियों के नाम भी फाइनल?
अब अगले हफ्ते मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार के पक्ष रखने के बाद भाजपा सरकार बनाने की कसरत को आगे बढ़ाएगी। माना जा रहा है कि अदालत में गृह मंत्रालय उपराज्यपाल नजीब जंग की सरकार बनाने के लिए की जा रहे प्रयासों के तहत राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को प्रस्ताव भेजने और उस पर राष्ट्रपति की अनुमति मिलने का ब्योरा पेश करेगी।
सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने लगभग मन बना लिया है कि अदालत की सुनवाई के बाद संभवत: 11 सितंबर को भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाने की योजना है। जिसमें जगदीश मुखी को मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में मंजूरी दिए जाने की तैयारी है।
अगर कोई अदालती अड़चन नहीं आई तो मुखी की अगुवाई में कुछ निर्दलीय और आपके संभावित बागी विधायकों के समर्थन से सरकार बनाई जाएगी।
ना जा रहा है कि मुखी के बाद भाजपा रामवीर सिंह विधूड़ी को दिल्ली की नई सरकार के कैबिनेट में नंबर दो की हरैसयित दे सकती हे। विधूड़ी ही बाकी दलों के विधायकों को भाजपा के साथ जोड़ने के अभियान की अगुवाई कर रहे हैं।
जोड़तोड़ से डरी कांग्रेस, विधायकों पर बढ़ा 'पहरा'
दिल्ली में सरकार बनाने को लेकर जारी राजनीतिक ड्रामे
के बीच कांग्रेस ने अपने घर की सुरक्षा बढ़ा दी है। पार्टी ने अपने आठ
विधायकों को भाजपा की नजर से बचाने के लिए तैयारियां तेज कर दी है। दिल्ली
के प्रभारी महासचिव शकील अहमद विधायकों से लगातार संपर्क में है।
शनिवार
को भाजपा पर निशाना साधते हुए शकील अहमद ने कहा कि दिल्ली में भाजपा के
लोग सत्ता में आना चाहते हैं, लेकिन खतरा नहीं उठाना चाहते, इसलिए चुनाव
में नहीं जाना चाहते। भाजपा के सूत्र लगातार दावा कर रहे है कि उनके संपर्क
में आप और कांग्रेस दोनों के विधायक हैं। इन संकेतों से कांग्रेस के कान
खड़े हो रहे है।
भाजपा और आप की खींचतान में कांग्रेस बदनाम नहीं
होना चाहती। वैसे दिल्ली की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के
लौटने की खबरों से कांग्रेस के भीतर ही सवाल उठ रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस
अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली और महासचिव अजय माकन शीला की वापसी के खिलाफ
हैं।
पार्टी हाईकमान को भी इस बात की जानकारी है। इसलिए लवली को
भरोसे में लिया जा रहा है। कांग्रेस हाईकमान जानता है कि लवली के समर्थन
में पार्टी के तीन से चार विधायक हैं। लवली नाखुश हुए तो पार्टी को इसका
नुकसान उठाना पड़ सकता है।