दिल्ली के चुनावी जंग को बेहद करीबी मुकाबले में तब्दील होने के फीडबैक के बीच प्रदेश भाजपा कार्यकर्ताओं के उम्मीद से कम उत्साह ने पार्टी हाईकमान को बेचैन कर दिया है। माना जा रहा है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी प्रदेश के पार्टी कार्यकर्ताओं के इस चुनावी जंग में खुद को पूरी तरह से झोंक देने के जज्बे को लेकर मुतमइन नहीं हैं।
शायद प्रदेश कार्यकर्ताओं पर एतबार में आई इस कमी का ही नतीजा है कि पहले से ही दिल्ली के दंगल में जुटे बाहरी कार्यकर्ताओं की भरमार के बावजूद जंग जीतने के लिए शाह ने 13 राज्यों से कार्यकर्ताओं की और फौज बुलाई है।
ये कार्यकर्ता केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों के साथ जुटकर शाह के चुनावी प्रबंधन को जमीन पर अंजाम देंगे। कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसदीय सीट बनारस से भी कार्यकर्ता दिल्ली आ रहे हैं।
भाजपा अध्यक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनौती स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने की है। टिकटों बंटवारे में गड़बड़ी और किरन बेदी को चेहरा बनाने के बाद से प्रदेश के नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक में अंदरखाने मायूसी का आलम है।
इसीलिए चुनाव अभियान में पार्टी की कामयाबी के लिए उनके जज्बे पर भी इस मायूसी का असर है। चुनावी प्रबंधन की अपनी खामियों को ढकने के प्रयास में भाजपा ने जहां एक ओर आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल पर सियासी हमला तेज कर दिया है।